चट्टी चौराहे,लोढ़ी हॉस्पिटल में घूम रही दलाल इलाज कराने आई मरीजों को बहला पुसलाकर कमिशन वाले जगह पर ले जाती है।
सोनभद्र। जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का फायदा उठाकर कुछ निजी पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड केंद्र मरीजों से मनमाना शुल्क वसूल रहे हैं। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब मजदूर, किसान और जरूरतमंद मरीज अस्पतालों के बाहर सक्रिय दलालों के झांसे में आकर आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में जांच की लंबी प्रतीक्षा और सीमित सुविधाओं के कारण मरीजों को निजी केंद्रों की ओर मोड़ दिया जाता है, जहां उनसे निर्धारित दरों से कई गुना अधिक रकम ली जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज कराने आए मरीजों का कहना है कि अस्पताल परिसर और आसपास कुछ लोग स्वयं को मददगार बताकर मरीजों को निजी पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड केंद्रों तक पहुंचाते हैं। बदले में उन्हें कमीशन मिलता है। कई मामलों में मरीजों को यह तक नहीं बताया जाता कि जांच की वास्तविक कीमत क्या है। गरीब परिवार कर्ज लेकर या मजदूरी की कमाई खर्च कर जांच कराने को मजबूर हो रहे हैं।
जानकारों के अनुसार जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए डेढ़ से दो माह तक की प्रतीक्षा होने के कारण बड़ी संख्या में मरीज निजी केंद्रों का रुख करते हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन सीमित संख्या में ही अल्ट्रासाउंड जांच हो पाने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर अवैध रूप से संचालित पैथोलॉजी और क्लीनिकों पर कार्रवाई भी करता रहा है। इस वर्ष कई अवैध पैथोलॉजी केंद्रों को सील किया गया तथा बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों के खिलाफ नोटिस और कानूनी कार्रवाई की गई।
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्साधिकारी से मांग की है कि निजी पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की दरों की नियमित निगरानी कराई जाए, अस्पतालों के आसपास सक्रिय दलालों पर कार्रवाई हो तथा जांच शुल्क की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कराई जाए। साथ ही सरकारी अस्पतालों में जांच सुविधाओं का विस्तार कर मरीजों को राहत देने की मांग भी उठाई गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस व्यवस्था पर अंकुश नहीं लगाया गया तो गरीब और असहाय मरीजों का आर्थिक शोषण लगातार बढ़ता रहेगा। स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
