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बिल्डर पर फर्जी RWA के गठन का आरोप, लामबंद हुए ग्रीन ऑर्किड के निवासी, मांगा जवाब, कानूनी कार्यवाही की चेतावनी

•अध्यक्ष हेमंत शर्मा के नेतृत्व में बिल्डर प्रतिनिधि से मिले             ग्रीन ऑर्किड सोसाइटी वासी

• आईएफएमएस और मेंटेनेंस की धनराशि का मांगा हिसाब

बिल्डर प्रतिनिधि शशांक अग्रवाल से मिलते सोसाइटी वासी

मुरादाबाद (विधान केसरी)। ग्रीन ऑर्किड सोसायटी में फर्जी तरीके से दूसरी आरडब्ल्यूए के गठन और उसके बैंक खाते में जमा धनराशि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मंगलवार को आरडब्ल्यूए अध्यक्ष हेमंत शर्मा के नेतृत्व में पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में सोसायटी वासियों ने बिल्डर प्रतिनिधि शशांक अग्रवाल से मुलाकात की। निवासियों ने बिल्डर पर कथित रूप से अलग आरडब्ल्यूए गठित करने का आरोप लगाते हुए उसके पदाधिकारियों की सूची सार्वजनिक करने तथा खाते में जमा एवं खर्च की गई धनराशि का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने की मांग की।

अध्यक्ष हेमंत शर्मा ने कहा कि जब सोसायटी वासियों द्वारा विधिवत आरडब्ल्यूए का गठन किया जा चुका है, तब बिल्डर की ओर से अलग आरडब्ल्यूए के गठन का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि कथित आरडब्ल्यूए का गठन कब और किस प्रक्रिया के तहत किया गया तथा उसके पदाधिकारी कौन हैं। साथ ही उसके बैंक खाते में अब तक कितनी धनराशि जमा हुई और उसका उपयोग कहां किया गया, इसका विवरण भी निवासियों के सामने रखा जाए।

बिल्डर के खिलाफ रोष प्रकट करते ग्रीन ऑर्किड सोसायटी वासी

हेमंत शर्मा ने बिल्डर से एसएल ग्रुप से फ्लैट खरीदने के दौरान खरीदारों से लिए गए एक प्रतिशत आईएफएमएस (इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी) का भी पूरा हिसाब देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचित आरडब्ल्यूए के अस्तित्व में होने के बावजूद अलग आरडब्ल्यूए बनाकर वित्तीय लेनदेन किया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कथित आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों की सूची और वित्तीय विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए तो सोसायटीवासी सामूहिक रूप से कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाएंगे।

पूर्व अध्यक्ष अभिषेक चौबे ने भी दूसरी आरडब्ल्यूए के गठन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब बिल्डर की जानकारी में सोसायटी वासियों द्वारा वैधानिक प्रक्रिया के तहत आरडब्ल्यूए गठित की जा चुकी थी, तो दूसरी संस्था गठित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे वित्तीय अनियमितता की आशंका है और सोसायटी से संबंधित लाखों रुपये के लेनदेन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अभिषेक चौबे ने बताया कि सोसायटीवासी जल्द ही एकजुट होकर मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त से मुलाकात करेंगे। उन्हें पूरे प्रकरण से अवगत कराते हुए मामले की जांच और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

सचिव अवधेश भंडारी ने भी पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए कथित आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की। स्थानीय निवासी विपुल सक्सेना ने आरोप लगाया कि बिल्डर द्वारा बनाई गई कथित आरडब्ल्यूए के खाते में मेंटेनेंस की धनराशि लिए जाने से निवासियों के बीच वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरडब्ल्यूए से संबंधित सभी दस्तावेज, पदाधिकारियों की सूची और वित्तीय लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग की। बिल्डर प्रतिनिधि से मुलाकात करने वालों में मुकेश गुप्ता, विकास यादव, शमी दुबे, शोभन गर्ग, अनिल शर्मा, आलोक रंजन, आदित्य विश्नोई, डॉ. हिमांशु, मंजू चौधरी समेत बड़ी संख्या में सोसायटीवासी शामिल रहे। दूसरी ओर जब बिल्डर प्रतिनिधि शशांक अग्रवाल से इलेक्टेड आरडब्ल्यूए होने के बावजूद दूसरी RWA के गठन के बारे में पूछा गया और उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने आरडब्ल्यूए बनाने की बात तो स्वीकार की इसके अलावा कोई जवाब नहीं दिया।

बिल्डर प्रतिनिधि को दिया पत्र, मांगा जवाब
मंगलवार को ग्रीन ऑर्किड सोसाइटी के आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने अध्यक्ष हेमंत शर्मा के नेतृत्व में बिल्डर प्रतिनिधि शशांक अग्रवाल से मुलाकात कर कथित आरडब्ल्यूए के गठन और उसके बैंक खाते को लेकर सवाल उठाए। पदाधिकारियों ने पूछा कि उक्त आरडब्ल्यूए का गठन कब और किस प्रक्रिया के तहत किया गया तथा इसके गठन में सोसाइटी के निवासियों की सहमति कब ली गई। उन्होंने आरडब्ल्यूए के गठन, चुनाव प्रक्रिया और बैंक खाता खोलने से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही निवासियों से आईएफएमएस और मेंटेनेंस के नाम पर जमा की गई धनराशि का पूरा हिसाब और बैंक स्टेटमेंट उपलब्ध कराने को कहा। पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सोसाइटी के निवासियों को उनकी जमा धनराशि और उसके उपयोग की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। संतोषजनक जवाब और अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने पर संबंधित अधिकारियों और सक्षम प्राधिकरणों के समक्ष मामला उठाने की बात कही गई है।

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