•सोशल मीडिया पर मचा बवाल, खुद को भाजयुमो का जिला मंत्री बताते है अभिषेक
• अपनी ही सरकार के फैसले का विरोध पड़ सकता है भारी
मुरादाबाद (विधान केसरी)। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जहां प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने इसे अपनी मांगों की जीत के रूप में देखा, वहीं मुरादाबाद में खुद को भाजपा युवा मोर्चा का जिला मंत्री बताने वाले अभिषेक राठौर की एक फेसबुक पोस्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उनकी पोस्ट की भाषा और छात्र आंदोलन को लेकर की गई टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र आंदोलन और परीक्षा संबंधी विवादों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजा था। बाद में राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इस्तीफे के बाद सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगों पर भी आश्वासन दिया गया, जिसके बाद जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन समाप्त कर दिया गया। वहीं अभिषेक राठौर ने अपनी ही सरकार के फैसले के खिलाफ लिखकर सोशल मीडिया पर एक नया विवाद छेड़ दिया है।
अभिषेक राठौर ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट करते हुए लिखा “देश की बदलती शिक्षा नीति में अहम योगदान देने वाले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो तुमने साज़िश रचकर करवा लिया वामपंथियों, अब जरा प्रहलाद जोशी जी के बारे में भी पढ़ लो। अब क्या करोगे वामपंथियों, जोशी जी तो असली ब्राह्मण हैं और तुम जंतर-मंतर पर ब्राह्मणवाद से आजादी मांग रहे थे।”
उनकी इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों से जुड़े आंदोलन को जाति और राजनीतिक विचारधारा के नजरिए से देखना कितना उचित है। अजय चौधरी नाम के एक फेसबुक यूजर ने अभिषेक राठौर की पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि विद्यार्थियों की चिंता और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने अभिषेक राठौर पर शिक्षा के मुद्दे को जातिगत राजनीति की ओर ले जाने का आरोप लगाते हुए उनकी राजनीतिक समझ पर भी सवाल उठाए। वहीं ऋषभ चौधरी ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “क्या आप अपने आप को कुछ ज़्यादा ही समझदार समझते हैं? आप जो भी पोस्ट करते हैं, क्या आपको वाकई उसका मतलब और उसका संदर्भ पता होता है?” अभिषेक राठौर की पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर पक्ष-विपक्ष में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आलोचना करने वाले यूजर्स का कहना है कि जब देश के विद्यार्थी परीक्षा व्यवस्था और अपने भविष्य से जुड़े सवाल उठा रहे हों, तब इस मुद्दे को जाति अथवा विचारधारा से जोड़ने के बजाय उनकी मूल चिंताओं पर चर्चा होनी चाहिए।
फिलहाल अभिषेक राठौर की ओर से उनकी पोस्ट पर हो रही आलोचना को लेकर कोई अलग स्पष्टीकरण सामने आने की जानकारी नहीं है। यदि उनका पक्ष सामने आता है तो उसे भी खबर में शामिल किया जाना उचित होगा।
