लखनऊ। राजधानी की ऐतिहासिक शाहमीना दरगाह के बाहर कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। प्रशासनिक पाबंदियों और सख्त निर्देशों को दरकिनार कर यहां देर रात तक अवैध दुकानें और ठेले धड़ल्ले से लगाए जा रहे हैं। आलम यह है कि यह पूरा इलाका अब असामाजिक तत्वों, अपराधियों और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त लोगों का नया ठिकाना बनता जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यह पूरा अवैध कारोबार और देर रात तक सजने वाला बाजार मेडिकल कॉलेज चैकी इंचार्ज की खुली शह पर चल रहा है। पुलिस की गश्त और कार्रवाई के दावों के बीच शाहमीना दरगाह के बाहर का यह नजारा पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्थानीय पुलिस किसी बड़ी आपराधिक वारदात या प्रशासनिक हादसे का इंतजार कर रही है?
शाहमीना दरगाह का क्षेत्र केजीएमयू और लारी कार्डियोलॉजी जैसे प्रमुख अस्पतालों के बेहद करीब है। रात ढलते ही अवैध खान-पान की दुकानों पर असमाजिक तत्वों की भीड़ जुटने लगती है। अस्पताल आने-जाने वाले गंभीर मरीजों, उनके तीमारदारों और महिला राहगीरों के लिए इस रास्ते से गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं रह गया है। देर रात तक खुले रहने वाले इन ठिकानों पर नशेबाजी और हुड़दंग की शिकायतें भी आम हो चुकी हैं।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से संवेदनशील इलाकों में देर रात तक अवांछित गतिविधियों पर रोक के स्पष्ट आदेश हैं। इसके बावजूद शाहमीना शाह दरगाह के बाहर कानून के नियमों का सरेआम उल्लंघन हो रहा है।बड़ा सवाल कि अगर इस क्षेत्र में कोई अप्रिय घटना या आपराधिक साजिश को अंजाम दिया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर संबंधित चैकी इंचार्ज और अवैध दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई करेगा?
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