भांवरकोल/गाजीपुर। क्षेत्र के गोंड़ी खास गांव निवासी चार वर्षीय मासूम सिद्धार्थ की निर्मम हत्या के मामले में आरोपित दादी कबूतरी देवी की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद भी उसके माता-पिता के जख्म नहीं भर पाए हैं। इकलौते पुत्र का क्षत-विक्षत शव देखने के बाद से पिता जामवंत कुशवाहा और मां अनामिका गहरे सदमे में हैं। उनका कहना है कि कानूनी कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा हमेशा के लिए छिन गया।
पिता जामवंत कुशवाहा ने बताया कि पूरा परिवार कबूतरी देवी के व्यवहार से लंबे समय से परेशान था। आए दिन झगड़ा-फसाद करना और छोटी-छोटी बातों पर पुलिस बुला लेना आम बात हो गई थी। कई बार उन्होंने परिवार सहित घर छोड़कर कहीं और किराये पर रहने का विचार भी बनाया, लेकिन वृद्ध पिता की देखभाल और उनके भोजन-पानी की चिंता के कारण ऐसा नहीं कर सके।
जामवंत ने भावुक होकर कहा, आज सबसे बड़ा पछतावा यही है कि यदि हम पहले ही घर छोड़ देते तो हमारा मासूम सिद्धार्थ आज हमारे साथ होता। अब यह पीड़ा जीवनभर नहीं मिटेगी।
गौरतलब है कि 6 जुलाई को खेलते समय चार वर्षीय सिद्धार्थ रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया था। तीन दिन बाद, 9 जुलाई को उसका क्षत-विक्षत शव घर से कुछ दूरी पर खेत में मिला। पुलिस जांच के दौरान आरोपित दादी कबूतरी देवी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया, जिसके बाद पुलिस ने 12 जुलाई को उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
इस जघन्य घटना से पूरे गोंड़ी खास गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि मासूम की हत्या जैसा अपराध समाज के लिए अत्यंत गंभीर है और दोषी को कानून के अनुसार कठोरतम दंड मिलना चाहिए। फिलहाल मामले की आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।
