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लखनऊ: इंदिरा नगर में पार्क बना श्पार्किंग जोनश्रू सी-ब्लॉक में अवैध कब्जे से स्थानीय नागरिक परेशान, नगर निगम से जल्द कार्रवाई की गुहार


लखनऊ। राजधानी के नगर निगम जोन-7 अंतर्गत इंदिरा नगर क्षेत्र में सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। यहाँ सी-ब्लॉक स्थित शिवाजी मार्केट के सामने बने पार्क को वाहन स्वामियों द्वारा पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है। पार्क के अस्तित्व पर गहराते इस संकट और लगातार बढ़ती असुविधा से परेशान स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से तत्काल मामले में हस्तक्षेप कर पार्क को अतिक्रमण मुक्त कराने की माँग की है।

क्षेत्रीय निवासियों के अनुसार, इंदिरा नगर के सी-ब्लॉक में इरम डिग्री कॉलेज वाली मुख्य सड़क से लगभग 15 कदम आगे बढ़ते ही श्तिलक पूड़ी वालेश् की दुकान है। इसके बगल वाली गली में अंदर जाने पर (लगभग 10 कदम की दूरी पर) दाहिनी ओर स्थित नीम के पेड़ के पास एक सार्वजनिक पार्क है।

वर्तमान में इस पार्क का उपयोग बच्चे खेलने या बुजुर्ग टहलने के लिए नहीं कर पा रहे हैं, बल्कि आए दिन यहाँ दर्जनों कारें और अन्य चारपहिया व दोपहिया वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। पार्क की घास और हरियाली वाहनों के पहियों तले रौंदी जा रही है, जिससे पार्क का मूल स्वरूप पूरी तरह नष्ट हो रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम द्वारा इस पार्क का निर्माण बच्चों के शारीरिक विकास, खेलकूद और वरिष्ठ नागरिकों के सुबह-शाम टहलने के लिए किया गया था। लेकिन दिन-रात वाहनों की अनियंत्रित पार्किंग रहने के कारण पार्क का मूल उद्देश्य ही खत्म होता जा रहा है। पार्क के आसपास रहने वाले परिवारों को आवाजाही में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों की प्रमुख माँगें है कि पार्क के भीतर खड़ी की जा रही कारों और अन्य वाहनों को तुरंत हटवाया जाए। पार्क के चारों ओर मजबूत रेलिंग या बाउंड्री वॉल बनाई जाए, जिससे कोई भी वाहन अंदर न ले जाया जा सके। सार्वजनिक पार्क में अवैध रूप से वाहन खड़ा करने वालों के खिलाफ नगर निगम जोन-7 द्वारा चालान व जब्ती की कार्रवाई की जाए। नष्ट हो चुकी हरियाली और पार्क के स्वरूप को दोबारा बहाल किया जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर निगम जोन-7 के अधिकारियों ने जल्द ही इस दिशा में कड़े कदम नहीं उठाए, तो वे मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों और महापौर से करने को मजबूर होंगे।

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