लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में शीर्ष स्तर पर खींचतान और वर्चस्व की जंग गहराती जा रही है। कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद और कुलसचिव (रजिस्ट्रार) अर्चना गहरवार के बीच की तनातनी अब खुलकर प्रशासनिक फैसलों में सामने आने लगी है। ताजा मामले में कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कुलसचिव कार्यालय द्वारा जारी ट्रांसफर (स्थानांतरण) आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
अल्प समय के भीतर यह लगातार दूसरा मौका है जब कुलपति ने कुलसचिव के किसी अहम आदेश को पलटते हुए उसे प्रभावहीन कर दिया हो। एक के बाद एक निरस्त हो रहे फैसलों के चलते अब एशिया के इस प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान के प्रशासनिक कामकाज और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, केजीएमयू के कुलसचिव कार्यालय की ओर से कर्मचारियों के ट्रांसफर का एक आदेश जारी किया गया था। लेकिन जैसे ही यह फाइल आगे बढ़ी, कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए ट्रांसफर आदेश को निरस्त कर दिया।
यह पहला मौका नहीं है जब कुलसचिव अर्चना गहरवार के फैसलों पर कुलपति का हथौड़ा चला हो। इससे पूर्व डिप्टी रजिस्ट्रार से संबंधित एक प्रशासनिक आदेश जारी हुआ था, जिसे कुलपति ने निरस्त कर दिया था। अब कर्मचारियों के स्थानांतरण के आदेश को रद्द कर दिया गया है।
लगातार दो बड़े प्रशासनिक फैसलों के वापस लिए जाने से विश्वविद्यालय में अधिकारों की लड़ाई और शीर्ष अधिकारियों के बीच समन्वय की भारी कमी जगजाहिर हो गई है।
विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति और कुलसचिव के बीच जारी इस रस्साकशी का सीधा असर दैनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों में संशय का माहौल है कि वे किसके आदेशों का पालन करें। शीर्ष अधिकारियों के आमने-सामने आने से फाइलें अटक रही हैं और कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक व शैक्षणिक निर्णय लंबित हो रहे हैं।केजीएमयू जैसे विश्वस्तरीय चिकित्सा संस्थान में इस तरह की खींचतान से इसकी गरिमा और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कर्मचारियों और संकाय सदस्यों के बीच अब यह चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है कि यदि शीर्ष नेतृत्व के बीच यही स्थिति रही, तो आने वाले दिनों में संस्थान की व्यवस्थाएं और अधिक चरमरा सकती हैं।
