किरावली/आगरा। गर्भनाशक दवाओं का बिना चिकित्सकीय सलाह के सेवन गंभीर और जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसा ही एक मामला करीब तीन वर्ष पूर्व किरावली तहसील के ग्राम नगला झब्बा निवासी पूनम (परिवर्तित नाम) के साथ सामने आया था।
जानकारी के अनुसार, दो बच्चों की मां पूनम को पुनः गर्भ ठहरने पर परिजनों ने बिना चिकित्सकीय परामर्श के गर्भनाशक दवा दे दी। दवा लेने के बाद लगातार दो दिनों तक रक्तस्राव होता रहा, लेकिन समय पर अस्पताल नहीं ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। महिला की स्थिति इतनी गंभीर थी कि परिजन उसे चारपाई पर लिटाकर ट्रैक्टर से अस्पताल लेकर पहुंचे और अस्पताल परिसर में भी कंधों पर चारपाई उठाकर अंदर ले जाना पड़ा।
अस्पताल पहुंचने पर महिला अर्धचेतन अवस्था में थी। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण चेहरा पीला पड़ चुका था और शरीर में खून की भारी कमी हो गई थी। चिकित्सकों ने तत्काल चार यूनिट रक्त की व्यवस्था कराई, आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं दीं, जांच कराई तथा आपातकालीन डी एंड सी (क्-ब्) प्रक्रिया कर रक्तस्राव को नियंत्रित किया। समय पर मिले उपचार से महिला की जान बच गई। हाल ही में पूनम पेट दर्द की शिकायत लेकर पुनः अस्पताल पहुंचीं, तब चिकित्सकों को यह घटना याद आ गई।
चिकित्सकों की सलाह-विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भनाशक दवाओं का सेवन केवल योग्य स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की सलाह पर ही करना चाहिए। दवा की सही मात्रा, सेवन का समय, संभावित दुष्प्रभाव और आवश्यक सावधानियों की जानकारी लेना बेहद जरूरी है। दवा लेने के बाद यदि अत्यधिक रक्तस्राव, तेज दर्द, चक्कर, बेहोशी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल पहुंचकर उपचार कराना चाहिए।
