अमरनाथ यात्रा में भी नहीं छूटा सरकारी डोंगल! छुट्टी पर गए बाबू की डिजिटल पेमेंट से मचा बवाल
पीलीभीत। सरकारी सेवा में अर्जित अवकाश का उद्देश्य कर्मचारी को पूरी तरह सरकारी दायित्वों से मुक्त रखना होता है, लेकिन जिले के एक विकासखंड में तैनात लिपिक (बाबू) की कार्यशैली ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि संबंधित बाबू अमरनाथ यात्रा पर 10 दिन के अर्जित अवकाश पर गए थे, लेकिन इसी दौरान उन्होंने सरकारी डोंगल के जरिए वित्तीय भुगतान (पेमेंट) को ऑनलाइन स्वीकृति दे दी। मामला सामने आने के बाद ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक इसकी चर्चाएं तेज हो गई हैं।सूत्रों के अनुसार, अवकाश के दौरान कर्मचारी किसी भी प्रकार के वित्तीय कार्य, डिजिटल प्रमाणीकरण अथवा सरकारी भुगतान प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकता। ऐसे में छुट्टी पर रहते हुए सरकारी डोंगल का उपयोग कर भुगतान स्वीकृत किए जाने को प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसी कौन-सी आपात स्थिति थी, जिसने छुट्टी पर गए कर्मचारी को भी सरकारी भुगतान प्रक्रिया में सक्रिय रहने के लिए मजबूर कर दिया।इस मामले ने कई तरह की अटकलों को भी जन्म दे दिया है। लोगों के बीच चर्चा है कि क्या संबंधित भुगतान किसी विशेष ठेकेदार या वेंडर से जुड़ा था, जिसे तत्काल जारी करना आवश्यक समझा गया, या फिर इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। आमजन यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जिन फाइलों के निस्तारण में सामान्य दिनों में लंबा समय लग जाता है, वही भुगतान अवकाश के दौरान इतनी तेजी से कैसे हो गया। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि कोई कर्मचारी अवकाश अवधि में सरकारी डोंगल अथवा डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग कर वित्तीय लेनदेन करता है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ और यदि हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है।अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह मामला केवल अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वित्तीय प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। वहीं यदि जांच नहीं हुई या मामला दबा दिया गया, तो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठना तय माना जा रहा है।
