- पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 270 वन कर्मियों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ, आधुनिक तकनीक
- एम-एस्ट्रिप्स, रेस्क्यू और मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन पर मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) मुख्यालय स्थित श्वन शहीद कुंदनलाल सभागारश् में गुरुवार को दैनिक वेतनभोगी से न्यूनतम वेतनभोगी बने वन कर्मियों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। विश्व प्रकृति निधि के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में कुल 270 वन कर्मियों को आधुनिक तकनीक, वन्यजीव संरक्षण और फील्ड प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए पीटीआर के फील्ड डायरेक्टर पीपी सिंह ने कहा कि किसी भी संस्था की सफलता टीम भावना और आपसी समन्वय पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो पहचान मिली है, उसका सबसे बड़ा श्रेय ग्राउंड लेवल पर कार्य करने वाले वन कर्मियों को जाता है। उन्होंने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती और सीखने की प्रक्रिया जीवनभर जारी रहनी चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं फॉरेस्ट गार्ड और वॉचरों से वन्यजीवों के बारे में बहुत कुछ सीखा है।
फील्ड डायरेक्टर ने कहा कि पदोन्नति के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं, इसलिए सभी कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से नियमित संवाद बनाए रखें। इससे किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति का समय रहते समाधान संभव हो सकेगा और कार्यक्षेत्र में बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
तराई आर्क लैंडस्केप परियोजना के समन्वयक डॉ. मुदित गुप्ता ने कहा कि अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाने की जिम्मेदारी फील्ड स्टाफ पर है। उन्होंने कर्मचारियों से प्रशिक्षण को केवल औपचारिक कार्यक्रम न मानकर व्यावहारिक कार्यशाला के रूप में लेने का आग्रह किया, जिससे वे 24 घंटे की ड्यूटी के दौरान वन सुरक्षा और निजी जीवन के बीच संतुलन बना सकें।
इससे पूर्व प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) मनीष सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य वन कर्मियों को आधुनिक तकनीक के अनुरूप दक्ष बनाकर वन एवं वन्यजीव संरक्षण को और प्रभावी बनाना है। वहीं वन एवं वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक भरत कुमार डीके ने एम-एस्ट्रिप्स पेट्रोलिंग, रेस्क्यू ऑपरेशन तथा स्थानीय ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय में फील्ड स्टाफ की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला।
वन्यजीव जैव विविधता समिति के महासचिव डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि बदलती परिस्थितियों में वन कर्मियों की भूमिका केवल वन सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए जनसंवाद स्थापित करना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में टाइगर रिजर्व के 270 वन कर्मियों को विशेषज्ञों द्वारा वन्यजीव ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग, मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन, कानून प्रवर्तन और फील्ड सुरक्षा जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में पूर्व वन अधिकारी विक्रम तोमर, रामशंकर मंडोला तथा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के दबीर हसन विशेषज्ञ के रूप में मार्गदर्शन करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में दबीर हसन ने सभी अधिकारियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फील्ड अनुभव और आधुनिक तकनीक का समन्वय ही बेहतर वन प्रबंधन की सबसे बड़ी कुंजी है। इस अवसर पर उपप्रभागीय वनाधिकारी रमेश चैहान, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के राहुल कुमार, राजेंद्र सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
