- जलजमाव पर प्रशासन हरकत में, लेकिन वर्षों की लापरवाही पर किसकी होगी जवाबदेही ?
बलिया। शिक्षा क्षेत्र सोहांव स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय कुतुबपुर में वर्षों से जलजमाव की समस्या इस बार भी सुर्खियां बनने के बाद प्रशासन को जगा गई। जिलाधिकारी एमपी सिंह के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड विकास अधिकारी की टीमें मौके पर पहुंचीं, पानी निकासी का रास्ता तलाशा जा रहा है। लेकिन बड़ा सवाल वही है, क्या हर साल मीडिया में खबर आने के बाद ही सरकारी मशीनरी जागेगी या कभी ऐसा भी दिन आएगा जब स्कूल बच्चों के पढ़ने लायक बनेगा, तैरने के लिए नहीं ?
ऐसे सरकारी तंत्र का भी अपना अलग मौसम होता है। मानसून आने से पहले पानी आ जाता है और खबर वायरल होने या छपने के बाद अधिकारी। शिक्षा क्षेत्र सोहांव के कन्या प्राथमिक विद्यालय कुतुबपुर में वर्षों से जलजमाव की समस्या इस बार भी पूरे शबाब पर है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार गंदे पानी में बच्चों से पहले प्रशासन की नाव उतर गई है।
विद्यालय के मुख्य द्वार से लेकर कक्षाओं तक गंदा पानी भरा है। बच्चे स्कूल कैसे पहुंचें, इसकी चिंता शायद बच्चों से ज्यादा उनके अभिभावकों को है। शिक्षक विभागीय अनुशासन के कारण गंदे पानी को चीरते हुए विद्यालय पहुंच रहे हैं। लगता है अब पढ़ाने के लिए बीएड के साथ तैराकी का प्रमाण पत्र भी जरूरी हो जाएगा।
विडंबना देखिए, अभी मानसून ने दस्तक भी नहीं दी थी, उसके पहले ही विद्यालय तालाब बन चुका है। यदि बारिश ने ठीक से मेहरबानी कर दी तो शायद उपस्थिति पंजिका भरना कठिन हो जाए। गांव की नाली का गंदा पानी विद्यालय में प्रवेश कर रहा है, मानो शिक्षा का मंदिर नहीं, गांव का सबसे निचला जलाशय हो।
ग्रामीण बताते हैं कि यह कोई नई कहानी नहीं है। हर साल बरसात आती है, पानी भरता है, बच्चे घर बैठते हैं अथवा दूसरे विद्यालय में भेजे जाते हैं। अधिकारी निरीक्षण करते हैं और फिर अगले साल वही पटकथा दोबारा मंचित होती है। शायद इसे ही सरकारी भाषा में ष्स्थायी अस्थायी व्यवस्थाष् कहा जाता होगा।
सबसे दिलचस्प दृश्य तब सामने आया जब मामला चर्चा में आया। जिलाधिकारी एमपी सिंह के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड विकास अधिकारी अपनी-अपनी टीमों के साथ विद्यालय पहुंचे। पानी निकालने के लिए रास्ता खोजा जा रहा है। अधिकारियों के जूते भी पहली बार उस पानी से रूबरू हुए, जिससे बच्चे और शिक्षक वर्षों से जूझ रहे हैं। प्रश्न यह नहीं है कि अधिकारी पहुंचे या नहीं। प्रश्न यह है कि समस्या आखिर कब समाप्त होगी ?।
