पीलीभीत। मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने और बाघ संरक्षण में अहम भूमिका निभाने वाले पीलीभीत बाघ अभयारण्य (पीटीआर) के श्बाघ मित्रश् अब नई सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी भी निभाएंगे। वन्यजीवों की निगरानी और संरक्षण संबंधी जागरूकता के साथ-साथ वे अब जंगल से सटे गांवों के लोगों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देंगे और उन्हें इनका लाभ दिलाने में सेतु की भूमिका निभाएंगे।
मुख्य वन संरक्षक बरेली पी.पी. सिंह ने बताया कि पीलीभीत का श्बाघ मित्र मॉडलश् देशभर में सराहा जा रहा है और कई राज्य इसे अपनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पीलीभीत के बाघ मित्र अन्य बाघ अभयारण्यों में जाकर स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। वर्तमान में पीटीआर में 124 बाघ मित्र कार्यरत हैं, जिनमें 120 पुरुष और चार महिलाएं शामिल हैं। सभी स्थानीय ग्रामीण हैं, जिन्हें वन विभाग द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
पीलीभीत बाघ अभयारण्य के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) मनीष सिंह ने बताया कि इस नई पहल को प्रभावी बनाने के लिए विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत प्रतिष्ठित संस्था श्हकदर्शकश् के माध्यम से बाघ मित्रों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसकी शुरुआत प्रायोगिक तौर पर पीलीभीत और उत्तराखंड के नैनीताल से की जा रही है।24 और 25 जुलाई को जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, रामनगर में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में पीलीभीत से 8 सदस्यीय बाघ मित्रों का दल भाग लेगा। प्रशिक्षण के बाद पहले चरण में यह योजना पीटीआर की माला और महोफ रेंज के संवेदनशील गांवों में लागू होगी। सफल परिणाम मिलने पर इसका विस्तार हरिपुर, बरही और दियोरिया रेंज तक किया जाएगा।वन विभाग का मानना है कि इस पहल से एक ओर बाघ संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर दूरदराज के ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
