लखनऊ। राजधानी का सबसे व्यस्त और प्रमुख माना जाने वाला नहर चैराहा, इन दिनों आम जनता के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं साबित हो रहा है। पिछले एक साल से यहाँ जारी अंडरपास निर्माण कार्य में कार्यदायी संस्था की घोर लापरवाही सामने आई है। निर्माणाधीन क्षेत्र की अव्यवस्था, उड़ती धूल और सड़कों पर फैली मिट्टी व जलभराव के कारण यह पूरा इलाका दुर्घटनाओं का श्हॉटस्पॉटश् बन चुका है।
नहर चैराहे पर प्रतिदिन हजारों गाड़ियों का आवागमन होता है। निर्माण कार्य के चलते खोदी गई मिट्टी सड़कों पर बिखरी पड़ी है। बारिश या पानी के छिड़काव के बाद यह मिट्टी गहरे कीचड़ और फिसलन में बदल जाती है।
फिसलन भरी सड़कों के कारण रोजाना बाइक सवार अनियंत्रित होकर गिर रहे हैं। पैदल चलने वाले बुजुर्गों और बच्चों का सड़क पार करना दूभर हो गया है। कार्यदायी संस्था द्वारा निर्माणाधीन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। न तो रिफ्लेक्टर या उचित बैरिकेडिंग लगाई गई है और न ही रात के समय राहगीरों को सतर्क करने के लिए पर्याप्त रेड-लाइट्स का इंतजाम है।एक स्थानीय दुकानदार के अनुसार ष्हर दिन यहाँ दो से तीन बाइक सवार फिसलकर गिरते हैं। निर्माण कार्य होना अच्छी बात है, लेकिन ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों को लोगों की जान-माल की सुरक्षा का ध्यान तो रखना ही चाहिए।
एक साल का समय बीत जाने के बाद भी अंडरपास का निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है। निर्माण में हो रही देरी का खामियाजा यहाँ के निवासी और राहगीर भुगत रहे हैं। जब धूप खिलती है तो सड़क पर जमा मिट्टी सूखी धूल बनकर हवा में तैरती है, जिससे आसपास के दुकानदारों और वाहन चालकों को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।
हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही वाले इस चैराहे पर रोज हो रहे हादसों के बावजूद संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।
स्थानीय नागरिकों की मुख्य मांगें है कि सड़क पर जमा मिट्टी की तत्काल सफाई कराई जाए। निर्माणाधीन स्थल के चारों तरफ मजबूत बैरिकेडिंग और रेड रिफ्लेक्टर लाइटें लगाई जाएं। निर्माण कार्य की गति बढ़ाकर इसे तय सीमा के भीतर जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
यदि प्रशासन ने समय रहते इस बदहाली और लापरवाही पर कड़ा रुख नहीं अपनाया, तो नहर चैराहे पर कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।
