लम्भुआ। शासन की मंशा के अनुरूप आम जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए आयोजित होने वाला समाधान दिवस कई स्थानों पर अपनी उपयोगिता खोता नजर आ रहा है। 190 विधानसभा लम्भुआ क्षेत्र में सोमवार को आयोजित समाधान दिवस में विकास खण्ड चाँदा, लम्भुआ और भदैया के जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली।
फरियादियों का आरोप है कि समाधान दिवस में केवल एक-दो मामलों का निस्तारण कर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, जबकि अधिकांश शिकायतें लंबित रह जाती हैं। कई विभागों द्वारा प्रार्थना-पत्रों पर कार्रवाई करने के बजाय फरियादियों को न्यायालय जाने की सलाह दे दी जाती है। ऐसे में गरीब, किसान और मजदूर अपना काम छोड़कर समाधान दिवस में आने के बावजूद निराश होकर लौटने को मजबूर हैं।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि अधिकांश मामलों का समाधान अंततः न्यायालय से ही होना है, तो समाधान दिवस का उद्देश्य और दायरा स्पष्ट किया जाना चाहिए। यह भी तय होना चाहिए कि किन प्रकार की शिकायतों का निस्तारण समाधान दिवस में किया जाएगा, ताकि जनता का समय और संसाधन व्यर्थ न हों।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण, अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति और जवाबदेही तय किए बिना समाधान दिवस अपनी वास्तविक उपयोगिता साबित नहीं कर पाएगा। लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, जिससे जनता का विश्वास कायम रहे और छोटे-छोटे विवाद समय रहते सुलझ सकें।
