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लखनऊः बीकेटी तहसील समाधान दिवस में 207 शिकायतें,41 शिकायत का मौके पर निस्तारण


लखनऊ। लखनऊ जिले के बख्शी का तालाब तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में शनिवार को विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 207 शिकायतें दर्ज की गईं। जिसमें 41 शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया। वहीं 166 मामलों को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेज दिया गया। वहीं समाधान दिवस में बड़ी संख्या में पहुंचे फरियादियों ने भूमि विवाद, अतिक्रमण, सड़क, विकास कार्य, पुलिस एवं अन्य जनसमस्याओं से जुड़े प्रकरण अधिकारियों के समक्ष रखे। राजस्व विभाग से सर्वाधिक 111 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें 26 मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया, जबकि 85 मामलों में जांच के निर्देश दिए गए। विकास विभाग से 27 शिकायतें आईं, जिनमें 9 का निस्तारण हुआ और 18 मामले लंबित रहे। पुलिस विभाग से 33 शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन किसी का भी तत्काल निस्तारण नहीं हो सका। स्वास्थ्य विभाग की 2 शिकायतें भी जांच के लिए भेजी गईं। समाज कल्याण विभाग को मिली 4 शिकायतों में से 1 का निस्तारण किया गया, जबकि 3 मामले लंबित रहे। अन्य विभागों से संबंधित 30 शिकायतों में 5 का मौके पर समाधान किया गया और 25 मामलों में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वहीं समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों ने सभी विभागों को लंबित शिकायतों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने कहा कि शिकायतों के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक प्रकरण का नियमानुसार निस्तारण कराया जायेगा। वहीं इसी समाधान दिवस में बख्शी का तालाब क्षेत्र की ग्राम पंचायत गोहना कला के ग्रामीणों ने ग्रामसभा की भूमि के सीमांकन और उस पर खड़े जंगली पेड़ों की नीलामी की मांग को लेकर प्रार्थना पत्र सौंपा। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत की गाटा संख्या 1179ख, 1180, 1188, 1189 एवं 1190 की भूमि राजस्व अभिलेखों में नवीन परती एवं ऊसर के रूप में दर्ज है, लेकिन वर्षों से इस भूमि पर बड़ी संख्या में जंगली पेड़ उग आए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि इन पेड़ों के कारण ग्रामसभा की भूमि का उपयोग जनहित के कार्यों में नहीं हो पा रहा है। खेल मैदान, गौशाला, कब्रिस्तान, बारातघर तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण के साथ-साथ शासन की विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। उनका कहना है कि यदि भूमि का सीमांकन कर नियमानुसार जंगली पेड़ों की नीलामी करा दी जाए तो ग्राम पंचायत की इस भूमि का उपयोग ग्रामीणों की आवश्यक सुविधाओं और विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि राजस्व एवं वन विभाग की संयुक्त टीम बनाकर पहले भूमि का सीमांकन कराया जाए। इसके बाद नियमानुसार जंगली पेड़ों की नीलामी कर भूमि को ग्राम पंचायत के विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराया जाए, जिससे शासन की योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। अधिकारियों ने ग्रामीणों की शिकायत प्राप्त कर संबंधित विभागों को नियमानुसार जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

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