- सपा जिला उपाध्यक्ष नरेन्द्र मिश्रा कट्टर सहित कई नेता और अधिवक्ता दूसरे दिन भी नजरबंद
पीलीभीत। जनपद में लगातार दूसरे दिन भी पुलिस प्रशासन की सख्ती देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष नरेन्द्र मिश्रा श्कट्टरश् को दूसरे दिन भी उनके आवास पर पुलिस निगरानी में रखा गया। इसके साथ ही जिले के कई अधिवक्ताओं और विभिन्न विपक्षी दलों से जुड़े नेताओं की गतिविधियों पर भी प्रशासन ने कड़ी नजर बनाए रखी। इस कार्रवाई ने जिले की राजनीतिक फिजा को गर्मा दिया है और विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश करार दिया है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि संभावित विरोध-प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर एहतियाती कदम उठाए गए हैं। हालांकि पुलिस ने औपचारिक रूप से ष्हाउस अरेस्टष् शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है, लेकिन संबंधित नेताओं के आवासों पर पुलिस बल की तैनाती और उनकी आवाजाही पर निगरानी ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
सपा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इस प्रकार की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। जानकारी के अनुसार, केवल सपा नेता ही नहीं बल्कि बार से जुड़े कुछ अधिवक्ता और अन्य राजनीतिक दलों के पदाधिकारी भी प्रशासन की निगरानी में हैं। माना जा रहा है कि किसी संभावित बड़े आंदोलन की आशंका को देखते हुए प्रशासन पहले से ही पूरी सतर्कता बरत रहा है।इस मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि जनपद में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और आवश्यकतानुसार एहतियाती निगरानी की जा रही है।
लगातार दूसरे दिन हुई इस कार्रवाई के बाद पीलीभीत की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे पूरी तरह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया एहतियाती कदम बता रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे क्या निर्णय लेता है और नजरबंद नेताओं पर लगी पाबंदियां कब हटाई जाती हैं।
