बलिया। जनपद के बांसडीह तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी के कटान से बचाव के लिए चल रही 8.73 करोड़ रुपये की बाढ़ सुरक्षा परियोजना सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना के तहत बनाए गए 17 कटर (ठोकरी) में से कई नदी में समा चुके हैं, जबकि बाढ़ का दबाव अभी चरम पर भी नहीं पहुंचा है। बढ़ते जलस्तर के बीच लोगों ने निर्माण की गुणवत्ता और बाढ़ विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बांसडीह तहसील के चांदपुर और महाराजपुर गांव में घाघरा नदी के कटान से सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये की लागत से संचालित बाढ़ सुरक्षा परियोजना को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 8.73 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए 17 कटर (ठोकरी) में से करीब नौ कटर नदी की धारा में समा गए हैं। उनका कहना है कि अभी बाढ़ का वास्तविक दबाव आना बाकी है, जबकि घाघरा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, कटान रोकने के लिए विभाग की ओर से झाड़-झंखाड़, बांस कैरेट और अन्य अस्थायी उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन इनका अपेक्षित असर नहीं दिख रहा है। आरोप है कि विभाग नदी किनारे से ही मिट्टी निकालकर प्लास्टिक की बोरियों में भरवा रहा है, जिससे किनारों पर गड्ढे बन रहे हैं और कटान का खतरा और बढ़ गया है।
ग्राम प्रधान रंजय कुमार सिंह सहित ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू से ही विवादों में रहा। उनका आरोप है कि जहां मानक के अनुरूप बालू से भरी जियो ट्यूब और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग होना चाहिए था, वहां मानकों की अनदेखी की गई। इस संबंध में पहले भी जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई थी।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि केवल झाड़-झंखाड़ और बांस डालने से कटान नहीं रुकेगा, बल्कि जियो ट्यूब जैसी प्रभावी तकनीक अपनानी होगी। इसके बावजूद विभाग ने निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अभी यह स्थिति है तो बाढ़ का पूरा दबाव आने पर परियोजना पूरी तरह विफल हो सकती है और नदी गांव तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, बाढ़ विभाग ने ग्रामीणों के आरोपों को लेकर अपना पक्ष भी रखा है। सहायक अभियंता आकाश यादव ने विभागीय कार्यों का बचाव करते हुए कहा कि कटान रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब बढ़ते जलस्तर के बीच यह देखना होगा कि विभाग के दावे कितने कारगर साबित होते हैं।
.jpg)