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लखनऊः यूपी पुलिस और वन विभाग का कॉल टू कॉल खेल आधी रात बेडरूम में घुसा 7 फीटा अजगर, मदद के बजाय सिर्फ नंबर बांटते रहे जिम्मेदार


लखनऊ। राजधानी लखनऊ के थाना ठाकुरगंज अंतर्गत आम्रपाली चैकी क्षेत्र में वन विभाग और डायल 112 की एक बेहद शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना करतूत सामने आई है। पुराना तोपखाना, गौशाला रोड (गेट नं. 4) के रहने वाले सर्वेश अवस्थी का परिवार आधी रात को साक्षात मौत के साए में जीने को मजबूर रहा, जबकि सरकारी महकमे के जिम्मेदार अधिकारी पूरी रात एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते हुए श्कॉल टू कॉलश् का खेल खेलते रहे।

घटना 24-25 जुलाई की मध्य रात्रि की है। सर्वेश अवस्थी अपनी पत्नी और दो मासूम बच्चों के साथ बेडरूम में सो रहे थे। रात के करीब 1रू00 बजे अचानक उन्हें कमरे में किसी अजीब सी आहट और सरसराहट की आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने लाइट जलाकर देखा तो पूरे परिवार के होश उड़ गएकृकमरे के फर्श पर 6 से 7 फीट लंबा विशालकाय अजगर चहलकदमी कर रहा था। बंद कमरे में अजगर को देखकर पूरा परिवार दहशत से कांप उठा।

सर्वेश अवस्थी ने हिम्मत जुटाकर तुरंत पुलिस आपातकालीन सेवा डायल 112 पर कॉल किया। वहाँ से ठाकुरगंज थाने का नंबर (078398 61103) दिया गया। थाने में संपर्क करने पर फॉरेस्ट विभाग का नंबर (7839434282) थमा दिया गया। वन विभाग के प्रतिनिधि ने क्षेत्र के अधिकारी से कॉल करवाने की बात कही।

इसके बाद शुरू हुआ जिम्मेदारियों से भागने का असली खेल।क्षेत्रीय अधिकारी (094543 85790) ने सीधे तौर पर कहा कि ष्यह मेरा क्षेत्र नहीं हैष् और दो अन्य नंबर (9452177688, 7510055218) दे दिए।दिए गए दोनों ही नंबर नेटवर्क कवरेज से बाहर या अनुपलब्ध थे।दोबारा संपर्क करने पर अधिकारी ने एक तीसरा नंबर (98709 525 03) दिया, जो पूरी तरह स्विच ऑफ मिला।लगभग दो घंटे तक परिवार लगातार मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन तंत्र की तरफ से सिर्फ नए-नए फोन नंबर मिलते रहे, कोई मदद नहीं पहुंची।

प्रशासनिक लापरवाही और कोई रास्ता न देख, सर्वेश अवस्थी और उनके परिवार ने अपनी जान जोखिम में डालकर खुद ही अजगर पर काबू पाने का फैसला किया। उन्होंने कड़ी मशक्कत और सूझबूझ के साथ किसी तरह अजगर को एक बोरी में बंद करके बांधा और उसके ऊपर एक बड़ा बर्तन ढक दिया। खौफ के साए में पूरा परिवार रात भर जाकर सुबह होने का इंतजार करता रहा।

सुबह होने पर जब दोबारा संपर्क किया गया, तब जाकर सुबह लगभग 9रू30 बजे वन विभाग के दो कर्मचारी पहुंचे और बोरी में बंद अजगर को अपने साथ ले गए।

मामले में नया मोड़ तब आया जब वन विभाग ने अपनी पीठ थपथपाते हुए आधिकारिक रिपोर्ट में दावा कर दिया कि ष्अजगर का रेस्क्यू रात में ही सफलतापूर्वक करके उसे जंगल में छोड़ दिया गया था।ष्

सर्वेश अवस्थी ने वन विभाग के इस झूठे दावे पर कड़ा ऐतराज जताया है। पीड़ित परिवार के पास आधी रात को खुद अजगर का रेस्क्यू करते हुए बनाया गया वीडियो मौजूद है, जो वन विभाग के दावों और फर्जी रिपोर्ट की सरेआम पोल खोल रहा है। इस घटना ने राजधानी में आपातकालीन सेवाओं और वन विभाग की मुस्तैदी के दावों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।

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