देश की राजधानी दिल्ली में भारी बारिश का कहर देखने को मिला है। दिल्ली के रोहिणी में एक इमारत गिर गई। इस हादसे में अबतक 3 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। यह दर्दनाक हादसा बीते बुधवार को हुई। घटना की सूचना मिलते ही बचाव अभियान मौके पर पहुंच गई। इस पूरे घटना की जांच की जा रही है। पुलिस ने गुरुवार को बताया कि उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रोहिणी में इमारत गिरने की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। रात भर चले बचाव अभियान के दौरान मलबे से दो और शव निकाले गए।
पुलिस के अनुसार, इस घटना के संबंध में एक एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। इस हादसे में एक मजदूर घायल भी हुआ है। इससे पहले अधिकारियों ने घायलों की संख्या पांच बताई थी। फिलहाल FIR की विस्तृत जानकारी तुरंत सामने नहीं आ पाई है।
बता दें कि भारी बारिश के बीच निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत गिरने के बाद बुधवार शाम को बचाव अभियान शुरू किया गया था। रोहिणी के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) शशांक जायसवाल ने एक आधिकारिक बयान में बताया, 'अभियान के दौरान, सद्दाम उर्फ रवि (32) नाम के एक मजदूर को मलबे से जिंदा निकाला गया और इलाज के लिए भेजा गया।' उन्होंने बताया कि बचाव अभियान के दौरान तीन शव बरामद किए गए हैं।
मृतकों की पहचान स्थानीय दर्जी राम (42), मजदूर कफे उर्फ नूरुल (24) और राम दुआ (62) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है मृतक राम दुआ इमारत के मालिक के पिता थे। राम को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। डीसीपी ने बताया कि लंबी खोजबीन के बाद मलबे से दो अन्य शवों को बाहर निकाला गया। बचाव अभियान लगभग पूरा हो चुका है।
बयान में कहा गया है कि यह सुनिश्चित करने के लिए मलबा हटाने का काम चल रहा है कि कोई और फंसा न हो। DCP जायसवाल के मुताबिक, घटना के संबंध में FIR दर्ज की गई है और इमारत गिरने के सही कारण की जांच की जा रही है।
इमारत बुधवार शाम करीब 4:20 बजे सेक्टर 16 में MCD स्कूल के पास प्रॉपर्टी नंबर G-4/152 और G-4/153 पर गिरी। पुलिस, DFS, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD), राजस्व विभाग और अन्य एजेंसियों ने मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल करते हुए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया।
MCD ने बुधवार को कहा कि गिरी हुई इमारतों को SARAL योजना के तहत बिल्डिंग प्लान की मंजूरी मिली थी। इस योजना के तहत प्रॉपर्टी के मालिक सर्टिफाइड आर्किटेक्ट या इंजीनियर के ज़रिए खुद से वेरिफाइड अंडरटेकिंग जमा करके ऑटोमैटिक मंजूरी और बिल्डिंग परमिट पा सकते हैं। नगर निकाय के शुरुआती आकलन के मुताबिक, जब इमारत गिरी तो उसके अंदर प्लंबिंग का काम चल रहा था और बीम व कॉलम जैसे स्ट्रक्चरल हिस्सों की ड्रिलिंग या कटिंग की वजह से भी यह घटना हो सकती है। हालांकि, MCD ने कहा कि घटना की असल वजह का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चलेगा।
