बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इस बैठक में कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें राज्य में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के विकास, 4 प्रमुख कॉरिडोर में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) की योजना, सरकारी भवनों पर 500 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने तथा मत्स्य इन्फ्रांस्ट्रक्चर के विकास के लिए नई कंपनी के गठन जैसे अहम फैसले शामिल हैं।
मंत्रिमंडल विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए बताया कि राज्य में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के सुनियोजित विकास के लिए अहमदाबाद स्थित सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी (CEPT) एडवाइजरी फाउंडेशन को नामांकन के आधार पर तकनीकी सहायता इकाई के रूप में चयन करने को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि सीईपीटी प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं की योजना बनाने, रणनीतिक मार्गदर्शन देने, नीतिगत सहायता उपलब्ध कराने, परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करने तथा नियामकीय एवं संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने में सहयोग करेगा।
चौधरी ने बताया कि इसके अलावा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी इसकी भूमिका होगी, जिससे परियोजनाओं को निर्धारित समय में उचित ढंग से पूरा करने में मदद मिलेगी। अपर मुख्य सचिव के अनुसार सरकार का मानना है कि इस पहल से राज्य में आधुनिक शहरी विकास को गति मिलेगी और नई सैटेलाइट टाउनशिप विकसित होने से उद्योग, व्यापार, आवास, शिक्षा और अन्य सेवाओं के नए केंद्र स्थापित होंगे।
उन्होंने कहा कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, निवेश आकर्षित होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव आने के साथ संतुलित एवं योजनाबद्ध शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि मंत्रिमंडल ने राज्य के चार प्रमुख कॉरिडोर- पटना-गया, पटना-बेगूसराय, पटना-हाजीपुर-सोनपुर और पटना-आरा में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) विकसित करने की दिशा में वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (AAR) और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि इस कार्य पर लगभग 31.59 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
चौधरी ने बताया कि मंत्रिमंडल ने अगले 5 सालों में राज्य के सरकारी भवनों पर कुल 500 मेगावाट क्षमता के ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने की योजना को भी मंजूरी दी है। यह योजना वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक रेस्को (RESCO) मॉडल पर लागू होगी। इसके तहत निजी एजेंसी अपने खर्च पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करेगी और सरकार उससे बिजली खरीदेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए संबंधित विभागों को डेवलपर के साथ बिजली खरीद समझौता (PPA) करने की भी स्वीकृति दी गई है।
सरकार का मानना है कि इस योजना से सरकारी भवनों पर बिजली खर्च में कमी आएगी, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को गति मिलेगी। रेस्को मॉडल के तहत सरकार को प्रारंभिक पूंजी निवेश नहीं करना होगा। निजी कंपनी संयंत्र स्थापित कर उसका संचालन करेगी और निर्धारित दर पर सरकार को बिजली उपलब्ध कराएगी।
