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बीसलपुरः गुर्दा रोग से जूझ रहे युवक ने फंदा लगाकर दी जान! बीमारी से परेशान 30 वर्षीय सुरजीत ने उठाया आत्मघाती कदम, परिवार में मचा कोहराम


बीसलपुर। नगर के मोहल्ला दुर्गा प्रसाद में सोमवार सुबह उस समय मातम पसर गया, जब एक 30 वर्षीय युवक का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। मृतक की पहचान स्वर्गीय सत्यपाल प्रजापति के पुत्र सुरजीत प्रजापति के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से गंभीर गुर्दा रोग से पीड़ित था और उसकी दोनों किडनियों का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा खराब हो चुका था। लंबे समय से चल रही बीमारी और लगातार बिगड़ती शारीरिक स्थिति के कारण वह गहरे मानसिक तनाव में था।परिजनों के अनुसार सुरजीत की हालत इतनी गंभीर थी कि तेज बुखार के कारण वह गर्मी के मौसम में भी पंखा नहीं चला पाता था और चिकित्सकीय कारणों से पर्याप्त पानी भी नहीं पी सकता था। लगातार इलाज के बावजूद उसकी स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हो रहा था, जिससे वह बेहद परेशान रहने लगा था।बताया गया कि रविवार देर रात करीब 11 बजे उसने अपने कमरे के रोशनदान में दुपट्टा बांधकर फंदा लगा लिया। सोमवार सुबह जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो उसकी छोटी बहन प्रज्ञा ने आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। संदेह होने पर दरवाजा खोला गया तो सुरजीत का शव फंदे से लटका मिला। यह दृश्य देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।

घटना की सूचना मिलते ही बीसलपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया।मृतक की बड़ी बहन राजकुमारी ने बताया कि उनके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। चारों भाई-बहन एक साथ रह रहे थे। रामलीला रोड पर उनका मकान निर्माणाधीन है, इसलिए फिलहाल वे सूरज कॉलोनी में किराए के मकान में रह रहे थे। उन्होंने बताया कि सुरजीत लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और उपचार से राहत नहीं मिलने के कारण बेहद निराश रहता था।प्रभारी निरीक्षक संजीव शुक्ला ने बताया कि युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।यदि आप या आपका कोई परिचित गंभीर बीमारी या मानसिक तनाव से जूझ रहा है, तो परिवार, मित्रों या किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना मददगार हो सकता है। समय पर सहायता लेना कई बार जीवन बचा सकता है।

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