कांवड़ यात्रा, रक्षाबंधन, स्वतंत्रता दिवस, ईद-ए-मिलाद और प्रतियोगी परीक्षाओं के मद्देनजर प्रशासन ने जारी किए व्यापक प्रतिबंधात्मक आदेश, ड्रोन उड़ाने और हथियारों के प्रदर्शन पर भी रोक
पीलीभीत। आगामी श्रावण मास की कांवड़ यात्रा, रक्षाबंधन, स्वतंत्रता दिवस, ईद-ए-मिलाद (बारावफात) समेत विभिन्न धार्मिक एवं राष्ट्रीय आयोजनों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं को शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने पूरे जनपद में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा-163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए हैं। जिला मजिस्ट्रेट ज्ञानेन्द्र सिंह द्वारा जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और यह 29 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा।
जिला प्रशासन का कहना है कि त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। साथ ही विभिन्न माध्यमों से ऐसी सूचनाएं भी प्राप्त हुई हैं कि कुछ असामाजिक एवं अराजक तत्व सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने, अफवाह फैलाने अथवा सांप्रदायिक एवं जातीय तनाव उत्पन्न करने का प्रयास कर सकते हैं। इन संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
आदेश के अनुसार किसी भी सार्वजनिक स्थान पर बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के जुलूस, धरना, प्रदर्शन, जनसभा अथवा अन्य सामूहिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। सार्वजनिक स्थलों पर पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर भी प्रतिबंध रहेगा। हालांकि शासकीय कार्यों के निर्वहन में लगे अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस आदेश से छूट प्रदान की गई है।
प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों के प्रदर्शन पर भी सख्ती दिखाई है। कोई भी व्यक्ति लाठी, डंडा, तलवार, चार इंच से अधिक फल वाला चाकू, बंदूक, रिवॉल्वर, पिस्टल या अन्य आग्नेयास्त्र लेकर सार्वजनिक स्थानों पर नहीं चल सकेगा और न ही उनका प्रदर्शन कर सकेगा। केवल ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मियों, दृष्टिबाधित अथवा अशक्त व्यक्तियों के सहारे के लिए उपयोग किए जाने वाले डंडे तथा सिख समुदाय के कृपाण धारण करने पर छूट रहेगी।
इसके अलावा बिना लाइसेंस तेजाब, विस्फोटक पदार्थ, ईंट, पत्थर, कांच के टुकड़े अथवा अन्य हिंसक सामग्री सार्वजनिक स्थानों या भवनों की छतों पर एकत्र करना प्रतिबंधित रहेगा। बिना सक्षम अनुमति लाउडस्पीकर एवं सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग पर भी रोक लगा दी गई है। अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों तथा न्यायालयों के 100 मीटर क्षेत्र को शांत क्षेत्र घोषित किया गया है।
जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ या भ्रामक सामग्री प्रसारित करने वालों को भी चेतावनी दी है। किसी भी धर्म, समुदाय या महापुरुष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करना, अफवाह फैलाना, भड़काऊ भाषण देना, सार्वजनिक स्थानों पर नशे की हालत में घूमना, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना तथा बिना अनुमति पोस्टर, बैनर, होर्डिंग और कटआउट लगाना प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना ड्रोन कैमरा उड़ाने पर भी पूर्ण रोक रहेगी।
जिला मजिस्ट्रेट ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था को विशेष परिस्थितियों में इन प्रतिबंधों से छूट की आवश्यकता है तो वह जिला मजिस्ट्रेट, नगर मजिस्ट्रेट अथवा संबंधित उपजिलाधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। आवेदन पर नियमानुसार विचार करते हुए आवश्यक अनुमति दी जा सकती है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा-223 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए ताकि त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान जिले में शांति एवं सौहार्द का वातावरण बना रहे।
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