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प्रतापगढः महिला को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश, फिर डायल 112 के सामने ही पिटाई! अब मुकदमा नहीं दर्ज कर रही है पुलिस


प्रतापगढ/बाबागंज।। महेशगंज थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक महिला को पहले तो दबंग ने उसे ट्रैक्टर से कुचलकर जान लेने का प्रयास किया, फिर झूठे चोरी के आरोप में डायल 112 बुलाकर पुलिस के सामने ही उसकी पिटाई कर दी। डायल 112 की सूचना पर आरोपी को हिरासत में लेने के बावजूद स्थानीय पुलिस अब श्जांचश् का हवाला देकर मुकदमा दर्ज करने में देरी कर रही है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगें हैं।

थाना क्षेत्र के बहादुर का पुरवा मजरे ऐमापुर बिंधन गांव निवासी वंदना यादव पत्नी रामजीत यादव का कहना है कि बुधवार को वह अपने घर के सामने रास्ते पर खड़ी थी। इसी दौरान गांव का ही एक दबंग युवक ट्रैक्टर लेकर वहां पहुंचा और जान से मारने की नीयत से उसके ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया। महिला किसी तरह हटकर अपनी जान बचाते हुए घर के भीतर भाग गई।

घटना के कुछ देर बाद वही युवक मोबाइल चोरी का झूठा आरोप लगाकर डायल 112 को बुला लिया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत कर रही थी। इसी दौरान आरोपी युवक ने पुलिसकर्मियों के सामने ही महिला पर हमला कर दिया। उसने महिला का गला दबाकर मारपीट शुरू कर दी, जबकि उसकी पत्नी ने भी महिला को पीटा। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया तो वह अपना ट्रैक्टर छोड़कर मौके से भाग निकला। महिला का आरोप है कि भागते समय आरोपी उसके कान का सोने का टप भी लेकर फरार हो गया।

डायल 112 की सूचना के बाद स्थानीय पुलिस सक्रिय हुई और काफी मशक्कत के बाद आरोपी को हिरासत में लेकर थाने ले आई। हालांकि अगले दिन पुलिस द्वारा मामले में दोबारा जांच की बात कहे जाने से पीड़िता पक्ष ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब डायल 112 ने मौके की घटना की पुष्टि कर दी और आरोपी को हिरासत में भी ले लिया गया, तो फिर मुकदमा दर्ज करने के बजाय जांच के नाम पर देरी क्यों की जा रही है।

इस संबंध में प्रभारी एसओ नीरज सिंह कुशवाहा का कहना है कि आरोपी को हिरासत में लेकर मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मौके पर पहुंची डायल 112 की टीम ने घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस को दी, आरोपी को हिरासत में लेकर थाने भी लाया गया, तो आखिर मुकदमा दर्ज करने में देरी किस आधार पर की जा रही है? पुलिस की यह कार्यप्रणाली अब खुद सवालों के घेरे में है।

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