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पीलीभीतः जनपद में शंकराचार्य की गौ-रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा से पहले सियासी-धार्मिक संग्राम तेज! यात्रा को बताया राजनीतिक एजेंडा


नाथ संप्रदाय के महंत योगी हनुमान नाथ ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सार्वजनिक शास्त्रार्थ की दी चुनौती

पीलीभीत। एक जुलाई को प्रस्तावित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की श्गौ-रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्राश् से पहले पीलीभीत में धार्मिक और राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। यात्रा शुरू होने से ठीक एक दिन पहले नाथ संप्रदाय के प्रतिनिधि एवं ध्वजवाहक महंत योगी हनुमान नाथ ने मंगलवार को प्रेसवार्ता कर शंकराचार्य पर तीखा हमला बोला। उन्होंने गौ संरक्षण के मुद्दे पर सार्वजनिक शास्त्रार्थ (शास्त्र चर्चा) की खुली चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ वर्षों से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लगातार गोरक्षपीठ, उसके पीठाधीश्वर तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आधारहीन और आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं।महंत योगी हनुमान नाथ ने कहा कि गोरक्षपीठ केवल एक धार्मिक संस्था नहीं बल्कि करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे प्रतिष्ठित पीठ और उसके पीठाधीश्वर के खिलाफ लगातार दिए जा रहे बयान संत परंपरा की मर्यादा के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद और सार्वजनिक अपमान की परंपरा कभी नहीं रही। यदि किसी संत को किसी विषय पर आपत्ति है तो उसका समाधान संवाद और शास्त्रार्थ से होना चाहिए, न कि मंचों से आरोप लगाने से।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित श्गौ-रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्राश् का वास्तविक उद्देश्य गौ संरक्षण नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार और गोरक्षपीठ द्वारा बीते नौ वर्षों में गौवंश संरक्षण के लिए किए गए कार्यों को कटघरे में खड़ा करना तथा राजनीतिक वातावरण तैयार करना प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में गौ संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता है तो इस विषय पर तथ्य, आंकड़े और प्रमाण जनता के सामने रखे जाने चाहिए।

महंत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे किसी भी सार्वजनिक मंच पर गौ संरक्षण के मुद्दे पर शास्त्रार्थ के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा पिछले नौ वर्षों में स्थापित गौशालाओं, निराश्रित गौवंश के संरक्षण, चिकित्सा, चारे की व्यवस्था तथा अन्य योजनाओं के विस्तृत तथ्य उनके पास उपलब्ध हैं। साथ ही वे यह भी बताने को तैयार हैं कि इन नौ वर्षों से पहले प्रदेश में गौवंश की स्थिति क्या थी और वर्तमान में क्या बदलाव हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने आरोपों पर कायम हैं तो उन्हें सार्वजनिक मंच पर आकर प्रमाणों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं कर सकते तो उन्हें अपने आरोप वापस लेने चाहिए। महंत ने यह भी कहा कि यदि शास्त्रार्थ स्वीकार नहीं किया जाता है तो कम से कम पीलीभीत आने से पहले उन्हें अपने बयानों पर पुनर्विचार करना चाहिए।

प्रेसवार्ता के दौरान महंत योगी हनुमान नाथ ने यात्रा आयोजकों को भी खुली बहस का निमंत्रण देते हुए कहा कि यदि उन्हें लगता है कि यह यात्रा समाज और धर्म के हित में है तो वे सार्वजनिक रूप से इसके औचित्य को सिद्ध करें। उन्होंने दावा किया कि धर्म के नाम पर समाज में भ्रम फैलाना उचित नहीं है और जनता को वास्तविक तथ्यों से अवगत कराया जाना चाहिए। महंत ने जनपदवासियों से अपील करते हुए कहा कि उनके अनुसार यह यात्रा धर्म और समाज के व्यापक हित में नहीं है। इसलिए लोग बिना तथ्यों को जाने किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं। उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया कि उनकी ओर से दी गई सार्वजनिक शास्त्रार्थ की चुनौती शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती तक अवश्य पहुंचाई जाए, ताकि यदि वे चाहें तो खुले मंच पर संवाद हो सके। गौरतलब है कि एक जुलाई को प्रस्तावित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की श्गौ-रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्राश् को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक और धार्मिक बयानबाजी तेज बनी हुई है। अब नाथ संप्रदाय की ओर से सार्वजनिक शास्त्रार्थ की चुनौती दिए जाने के बाद यह विवाद और अधिक गहरा गया है। यात्रा से ठीक पहले सामने आए इस घटनाक्रम ने पीलीभीत समेत प्रदेश की धार्मिक और राजनीतिक हलचल को नई दिशा दे दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शंकराचार्य इस चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और प्रस्तावित यात्रा के दौरान आगे क्या घटनाक्रम सामने आता है।

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