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प्रतापगढः मिट्टी से जुड़कर बनाई नई पहचान, जैविक खेती से सफलता की मिसाल बने प्रतापगढ़ के उत्कृष्ट पाण्डेय


वायुसेना की नौकरी छोड़ अपनाई जैविक खेती, आज सालाना 10 से 12 लाख रुपये की हो रही आय

प्रतापगढ़। आधुनिक कृषि के इस दौर में जहां अधिकांश किसान रासायनिक खेती पर निर्भर हैं, वहीं जनपद प्रतापगढ़ के विकास खण्ड मंगरौरा अंतर्गत ग्राम भदौना निवासी युवा किसान उत्कृष्ट पाण्डेय ने जैविक खेती को अपनाकर न केवल अपनी अलग पहचान बनाई है, बल्कि क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गए हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि आधुनिक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता के साथ खेती की जाए तो कृषि भी सम्मानजनक आय और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन सकती है। उत्कृष्ट पाण्डेय ने लगभग दस वर्ष पूर्व पैरामिलिट्री में असिस्टेंट कमाण्डेंट पद की प्रतिष्ठित नौकरी को छोड़कर गांव लौटने का साहसिक निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग हटकर जैविक खेती को अपनाया और आज वे अपने ‘ऋषि ग्राम ऑर्गेनिक्स मण्डल’ नामक फर्म के माध्यम से न केवल स्वयं आर्थिक रूप से समृद्ध हुए हैं, बल्कि आसपास के किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

उत्कृष्ट पाण्डेय का मानना है कि खेती केवल जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का एक सशक्त साधन है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के दुष्प्रभावों को समझते हुए जैविक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया। प्रारंभिक वर्षों में उन्हें अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और नवाचार की सोच ने उन्हें सफलता के शिखर तक पहुंचाया। आज उनका फार्म जैविक कृषि के एक उत्कृष्ट मॉडल के रूप में स्थापित हो चुका है। यहां विभिन्न प्रकार की जैविक फसलें, औषधीय पौधे तथा मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें प्रदेश ही नहीं बल्कि प्रदेश के बाहर भी सराहा जा रहा है। उत्कृष्ट पाण्डेय की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है सफेद चन्दन की खेती। उन्होंने अपने फार्म हाउस परिसर में लगभग 2500 सफेद चन्दन के पौधे रोपित किए हैं। सफेद चन्दन एक बहुमूल्य वृक्ष माना जाता है, जिसकी बाजार में अत्यधिक मांग रहती है। इसकी खेती किसानों के लिए दीर्घकालिक निवेश के रूप में अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है। केवल स्वयं चन्दन की खेती करने तक ही उन्होंने अपने प्रयासों को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने अपने फार्म पर सफेद चन्दन की नर्सरी भी विकसित की है। यहां गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार कर इच्छुक किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी खेती से जुड़ सकें।

उत्कृष्ट पाण्डेय ने अपने कृषि मॉडल में औषधीय एवं विशिष्ट फसलों को भी शामिल किया है। लगभग दो एकड़ भूमि में पीली, काली एवं कस्तूरी हल्दी की खेती की जा रही है। इन विशेष किस्मों की हल्दी औषधीय गुणों से भरपूर होती है और बाजार में सामान्य हल्दी की अपेक्षा अधिक मूल्य प्राप्त करती है। वे न केवल इन किस्मों का उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी गुणवत्तायुक्त हल्दी बीज उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में औषधीय खेती का विस्तार हो रहा है। इससे किसानों को परंपरागत खेती की तुलना में बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं। उत्कृष्ट पाण्डेय का मानना है कि केवल उत्पादन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादों का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने फार्म पर विभिन्न कृषि उत्पादों को प्रसंस्कृत कर आकर्षक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के रूप में बाजार में उतारना शुरू किया। उनके द्वारा तैयार किए जा रहे प्रमुख उत्पादों में हल्दी पाउडर, विलौना घी, आंवला मुरब्बा, काला नमक चावल, अरहर दाल तथा अन्य जैविक उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों को ‘ऋषि ग्राम’ ब्रांड के माध्यम से बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। जैविक उत्पादों के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता और स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता के कारण इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि उनके उत्पादों की बिक्री प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी की जा रही है।

जैविक खेती, पौध उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन के समन्वित मॉडल के माध्यम से उत्कृष्ट पाण्डेय आज प्रतिवर्ष 10 से 12 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि इस धारणा को भी बदलती है कि खेती लाभ का व्यवसाय नहीं है। उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि यदि खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक प्रबंधन और बाजार आधारित रणनीति के साथ किया जाए तो यह युवाओं के लिए रोजगार और सम्मानजनक जीवन का बेहतर विकल्प बन सकती है।

उत्कृष्ट पाण्डेय का फार्म अब केवल खेती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों के लिए एक प्रशिक्षण एवं प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। यहां आने वाले किसान जैविक खेती, पौधशाला प्रबंधन, औषधीय फसलों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की जानकारी प्राप्त करते हैं। वे समय-समय पर किसानों के साथ अपने अनुभव साझा करते हैं तथा उन्हें कम लागत में अधिक आय प्राप्त करने के उपाय बताते हैं। उनके मार्गदर्शन से कई किसान जैविक खेती की ओर अग्रसर हुए हैं और बेहतर आर्थिक लाभ अर्जित कर रहे हैं। जैविक खेती केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता, जल की गुणवत्ता और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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