सुप्रीम कोर्ट ने सात मई को देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को पारिवारिक ट्रस्ट विवाद में मध्यस्थ नियुक्त किया था. जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने गुरुवार को रानी कपूर के उस आवेदन पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने 18 मई को होने वाली रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक को लेकर चिंता जताई थी.
रानी कपूर के वकील ने दलील दी कि रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड की मूल कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी है. बेंच ने गौर किया कि रानी कपूर बैठक के एजेंडे में शामिल उन चीजों को लेकर चिंतित थीं जो दो स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और कंपनी के बैंक खातों के संचालन के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में कुछ संशोधन से संबंधित हैं.
प्रिया कपूर और रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड सहित प्रतिवादियों की ओर से पेश वकील ने कहा कि स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए और यह बैठक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कुछ निर्देशों के तहत बुलाई गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'फिलहाल हम इस मामले में और कुछ कहना नहीं चाहते. हमने पहले ही मध्यस्थ से मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है. अभी के लिए हम पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे ऐसा कुछ न करें जिससे मध्यस्थता प्रक्रिया सीधे प्रभावित हो.' कोर्ट ने कहा कि फिलहाल 18 मई को होने वाली बैठक में दो स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में बदलाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं की जाए.
कोर्ट ने कहा, 'हम यह देखना चाहते हैं कि मध्यस्थता प्रक्रिया में क्या प्रगति होती है. मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त को होगी.' कोर्ट ने यह भी कहा कि इस बीच आरबीआई और अन्य वैधानिक प्राधिकरणों के निर्देशों और अनुपालन पर जोर नहीं दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने रानी कपूर की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी, जिसमें उन्होंने मध्यस्थता प्रक्रिया लंबित रहने तक प्रिया कपूर और अन्य लोगों को ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ के कामकाज में हस्तक्षेप करने से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया था.
सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल को प्रिया कपूर और अन्य लोगों से उस मुकदमे पर जवाब मांगा था, जिसमें संजय कपूर की मां ने पारिवारिक ट्रस्ट को अमान्य घोषित करने की मांग की है. संपत्ति और परिसंपत्तियों के नियंत्रण से जुड़ी कानूनी कार्यवाही दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में ट्रस्ट की सभी संपत्तियों के हस्तांतरण पर यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध किया गया है.a

