बाराबंकी । जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल पीजी.कॉलेज, में शनिवार को “नार्वे में हिंदी की प्रस्थिति” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी हिंदी की बढ़ती वैश्विक पहचान का सशक्त प्रमाण बनी। देश-विदेश से जुड़े विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि हिंदी अब केवल भारत की नहीं, बल्कि विश्व की भाषा बन चुकी है।नार्वे से आए अंतरराष्ट्रीय वक्ता सुरेशचंद्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ ने बताया कि नार्वे में हिंदी को मातृभाषा का दर्जा प्राप्त है और भारतीय मूल के लोग आपसी संवाद में हिंदी को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि आज हिंदी संवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार, संस्कार और संस्कृति की वैश्विक भाषा बन रही है। वहीं, चीन में सेवाएं दे चुके गंगाप्रसाद शर्मा ने बताया कि चीन के अनेक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है, जो इसकी अंतरराष्ट्रीय उपयोगिता को दर्शाता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य सीताराम सिंह ने की। उन्होंने कहा कि मातृभाषा हिंदी भारतीय संस्कृति और व्यक्तित्व की आत्मा है। संगोष्ठी ने यह संदेश दिया कि हिंदी सीमाओं से परे जाकर दुनिया को जोड़ने वाली भाषा के रूप में स्थापित हो रही है।इस मौके पर अम्बरीश कुमार शास्त्री, प्रो. रीना सिंह, प्रो. अमित कुमार, प्रो. कृष्णकांत चंद्र, प्रो. मानव कुमार सिंह, प्रो. शार्दुल विक्रम सिंह, प्रो. विजय कुमार वर्मा, प्रो. हेमंत सिंह, डॉ. अजीज रजा, डॉ. अर्चना सिंह, प्रो. दरक्षा शहनाज, डॉ. शालिनी गुप्ता, डॉ. किरण सिंह, डॉ. अरविंद कुमार पांडे, डॉ. प्रदीप कुमार सहित महाविद्यालय के कर्मचारी शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।
