पीलीभीत। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा आगामी दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में शीतलहर और कड़ाके की ठंड बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई है। इसी के मद्देनजर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जनपदवासियों को सतर्क रहने और शीतलहर से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है। अपर जिलाधिकारी (वि.ध्रा.) प्रसून द्विवेदी ने जनपद, तहसील, ब्लॉक और ग्राम स्तर तक सभी माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग सर्दी से बचाव के प्रति जागरूक हो सकें।
एडीएम ने बताया कि ठंड बढ़ने से पूर्व रेडियो, टीवी और अखबारों के माध्यम से मौसम की जानकारी लेते रहें। शरीर को गर्म रखने के लिए पर्याप्त ऊनी कपड़े पहनें और कपड़ों की कई परतों का इस्तेमाल करें। ठंड के मौसम में फ्लू, नाक बहना, खून आना जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं, इसलिए ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अत्यधिक ठंड के दौरान घर में ही रहने का प्रयास करें और अनावश्यक यात्रा से बचें। ढीले, हवा रोकने वाले ऊनी वस्त्रों की कई परतें पहनें। सिर, गर्दन, कान, हाथों और पैरों को पूरी तरह ढककर रखें, क्योंकि ठंड का सबसे अधिक असर इन्हीं अंगों पर होता है। दस्ताने, मोजे और टोपी का प्रयोग करें।गर्म पेय पदार्थ लें और पौष्टिक आहार का सेवन करें। शरीर की त्वचा को ठंड से बचाने के लिए तेल या क्रीम से मालिश करना लाभकारी है। बुजुर्गों, बच्चों और अकेले रहने वाले पड़ोसियों का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है।एडवाइजरी में यह भी बताया गया कि बंद कमरों में गर्मी पाने के लिए कोयला या अंगीठी न जलाएं, क्योंकि इससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस निकलती है जो जानलेवा होती है। यदि शरीर पर सुन्नपन, सफेदपन, कंपकपी, बोलने में परेशानी या भ्रम की स्थिति दिखे तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें, क्योंकि यह हाइपोथर्मिया या फ्रॉस्टबाइट के संकेत हो सकते हैं।
मौसम विभाग ने किसानों को चेताया है कि शीतलहर और पाला फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। पत्तियां जलने, रोग लगने और वृद्धि रुकने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि बोर्डो मिश्रण या कॉपर ऑक्सी-क्लोराइड जैसे छिड़काव करें, हल्की सिंचाई करते रहें और जहां संभव हो स्प्रिंकलर का प्रयोग करें। मिश्रित फसल पद्धति और पौधों को पुआल या प्लास्टिक से ढककर सुरक्षित करना भी उपयोगी है। हवा कम करने के लिए खेतों में विंडब्रेक लगाना भी फायदेमंद रहेगा।
एडवाइजरी में बताया गया कि ठंड के मौसम में पशुओं को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए उन्हें पर्याप्त और पौष्टिक चारा दें। रात में पशुशालाओं को ढककर रखें ताकि ठंडी हवाओं का सीधा प्रभाव न पड़े। पशुओं को ठंडा पानी न दें और उनके नीचे सूखा भूसा बिछाना लाभकारी है।पशुपालकों से यह भी अपील की गई है कि शीतलहर के दौरान पशुओं को खुले में न बांधें और न ही पशु मेलों में ले जाएं। अंत में प्रशासन ने कहा कि शीतलहर के दौरान जागरूकता और सतर्कता ही सुरक्षित रहने का सबसे अच्छा उपाय है। जनपदवासी प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन कर स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।
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