पीलीभीत। केंद्र और प्रदेश सरकार की किसान हितैषी योजनाओं ने अन्नदाता किसानों की समृद्धि का मार्ग खोला है। पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र को मजबूती देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गईं, जिससे गांव, खेत और खलिहान का स्वरूप तेजी से बदल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई स्वॉयल हेल्थ कार्ड योजना ने कृषि क्षेत्र को नई दिशा दी। इससे किसानों को अपनी मिट्टी की सेहत जानने और आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक उपयोग की सुविधा मिलने लगी। वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत देशभर के 12 करोड़ किसानों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की सहायता राशि मिल रही है, जिससे उनका आर्थिक बोझ कम हुआ है।प्रदेश में 8 वर्षों में 23 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचाई सुविधा से जुड़ी। अर्जुन सहायक, बाणसागर और सरयू नहर जैसी वर्षों से लंबित परियोजनाओं को पूरा करवाकर किसान परिवारों को पानी की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सरकार द्वारा 16 लाख निजी नलकूपों के बिजली बिल माफ करने का बड़ा लाभ भी किसानों को मिला।किसानों की उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए कई खरीद केंद्र स्थापित किए गए। एमएसपी का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे, इसके लिए तय किया गया कि जिस किसान के नाम भूमि है, उसी से उपज की खरीद की जाएगी।गन्ना मूल्य में 85 रुपये प्रति कुंतल वृद्धि कर सरकार ने गन्ना किसानों को बड़ी राहत दी है। प्रदेश में 2017 के बाद से 42 चीनी मिलों ने क्षमता बढ़ाई और कई नई मिलें स्थापित हुईं। अब गन्ना क्षेत्र 20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 30 लाख हेक्टेयर हो चुका है।ऑनलाइन पर्ची व्यवस्था लागू होने से घटतौली व माफियागिरी समाप्त हुई। चीनी मिलों, डिस्टलरी, एथेनॉल प्लांट और कोजेन प्लांट्स ने रोजगार के हजारों अवसर बढ़ाए हैं।सरकार का लक्ष्य है कि हर किसान को उसकी उपज का बेहतर दाम मिले और उसके जीवन में खुशहाली आए।
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