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प्रतापगढः आलू की पैदावार सुनिश्चित करने हेतु अपनायें रक्षात्मक दृष्टिकोण - जिला उद्यान अधिकारी


प्रतापगढ़। जिले में जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने सोमवार को बताया है कि जनपद में आलू के अच्छे उत्पादन हेतु सम-सामयिक महत्व के कीट एवं रोगों का उचित समय पर नियंत्रण नितान्त आवश्यक है। आलू की फसल पर अगेती एवं पिछेती झुलसा रोग के प्रति अत्यन्त संवेदनशील होती है। प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदा-बांदी एवं नम वातावरण में अगेतीध्पिछेती झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है तथा फसल को भारी क्षति पहुंचती है। ऐसी परिस्थितियों में जिला उद्यान अधिकारी ने आलू उत्पादकों को सलाह दी है कि आलू की पैदावार सुनिश्चित करने हेतु रक्षात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। अगेती झुलसा रोग का प्रकोप निचली पत्तियों से प्रारम्भ होता है, जिसके फलस्वरूप गहरे भूरेध्काले रंग के कुण्डलाकार छल्लेनुमा धब्बे बनते है, जो बाद में बीच से सूखकर टूट जाते है। प्रभावित निचली पत्तियॉ सूख कर गिर जाती है। इन धब्बों के बीच में कुण्डलाकार आकृति दिखाई देती है। पिछेती झुलसा रोग के प्रकोप से आलू की फसल को विशेष क्षति होती है। इस रोग से पत्तियॉ सिरे से झुलसना प्रारम्भ होती है जो तीव्रगति से फैलती है और 2 से 4 दिनों के अन्दर ही सम्पूर्ण फसल नष्ट हो जाती है। बदलीयुक्त 90 प्रतिशत से अधिक आर्द्र वातावरण एवं कम तापक्रम पर इस रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है। आलू के उन्नत फसल हेतु मुख्य किस्में यथा-कुफरी बहार, कुफरी बादशाह, कुफरी आनन्द, कुफरी चिपसोना-01 व 03, कुफरी सूर्या आदि की जनपद की जलवायु के अनुसार विभाग से प्रदत्त आलू बीज की बुवाई करना सुनिश्चित करें। आलू बीज उत्पादन हेतु सम्पूर्ण कन्द की बुवाई सुनिश्चित करें, कन्द को काट कर बोने की सलाह विभाग द्वारा नहीं दी जाती है।

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