फतेहपुर/बाराबंकी। कानपुर के बिठूर से गंगा स्नान कर लौट रहे आठ श्रद्धालुओं की कल्याणी पुल पर कार और ट्रक की टक्कर में दर्दनाक मौत के बाद भी सड़क सुरक्षा को लेकर न जनता चेत रही है, न प्रशासन। हादसे के चार दिन बीत जाने के बाद भी कल्याणी पुल पर न तो ओवरस्पीड पर नियंत्रण के उपाय किए गए हैं और न ही ब्लैक स्पॉट पर किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था सुधारी गई है।रविवार की रात हुए इस भीषण हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, लेकिन फतेहपुर-बाराबंकी मार्ग पर यातायात सुरक्षा अब भी भगवान भरोसे है। कल्याणी नदी के दोनों पुलों के बीच बना सर्पाकार मोड़ बेहद खतरनाक है। यहां दोनों ओर झाड़ियां उगी हुई हैं, बैरिकेडिंग पर रेडियम नहीं लगे हैं और सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे हादसों को और बढ़ा रहे हैं। पटरियां भी जगह-जगह टूटी या गायब हैं।स्टेट हाईवे विभाग की ओर से सिर्फ पीली स्ट्रिप पेंट कर खानापूर्ति कर दी गई है। देवा मेला के दौरान डीएम के आदेश के बावजूद मार्ग की झाड़ियां नहीं हटाई गईं। ब्लैक स्पॉट का बोर्ड झाड़ियों में छिपा हुआ है और स्पीड कंट्रोल संकेतक तक नजर नहीं आते।घटना के बाद चैथे दिन भी जब पुल से गुजरने वाले वाहनों की गति का जायजा लिया गया, तो अधिकांश वाहन तीव्र मोड़ पर भी तेज रफ्तार में दिखाई दिए। न हेलमेट, न सीट बेल्ट सड़क सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार हादसों के बावजूद प्रशासन और सड़क सुरक्षा समिति की लापरवाही जारी है। यदि शीघ्र ही यहां सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, तो यह ब्लैक स्पॉट और कितनी जानें लेगा, कहना मुश्किल है।
