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प्रतापगढः सपाइयों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जिलाधिकारी को राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा


प्रतापगढ़। जिले में मंगलवार को समाजवादी महिला सभा की जिलाध्यक्ष शान्ति सिंह एवं मजदूर सभा के जिलाध्यक्ष शिवबहादुर यादव श्गुड्डूश् के नेतृत्व में पैदल मार्च करते हुए जिला कलेक्ट्रेट में सरकारी विद्यालयों के मर्ज रसोईयों की छंटनी, बच्चों के शिक्षा अधिकार को प्रभावित करने तथा उत्तर प्रदेश सरकार की तानाशाह रवैया एवं गलत नीतियों के विरोध में विभिन्न मांगों को लेकर महामहिम राज्यपाल महोदया जी के नाम से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।

जिसमें सपाइयों की प्रमुख मांग निम्नवत है-

1- सभी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के मर्ज की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
2- सभी रसोइयों को पुनः बहाल किया जाए, उन्हें सम्मानजनक मानदेय, नियमित नियुक्ति तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए।
3- आरटीई कानून के अनुसार प्रत्येक बस्ती में 1कि.मी. की परिधि में प्राथमिक विद्यालय और 3 किमी के दायरे में उच्च प्राथमिक विद्यालय की व्यवस्था पुनः सुनिश्चित की जाए।
4- सभी मूलभूत सुविधाए गरीब पिछड़े नौनिहालों को दिया जाए।
5- मनरेगा मजदूरों को वर्ष में 300 दिनों का कार्यदिवस व 600ध्- प्रतिदिन मजदूरी हो ।
6- श्रम पोर्टल को तत्काल खोल दिया जाय तथा लाभार्थी को उसका लाभ दिया जाय ।
7- पुराने श्रम कानूनों को बहाल किया जाए तथा नए श्रम संहिता को समाप्त किया जाए।
8- पुलिस द्वारा दलितों एव अल्पसंख्यको का उत्पीडन बंद हो ।

इस अवसर पर जिला महासचिव अब्दुल कादिर जिलानी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार किसान, मजदूर, नौजवान, छात्र एवं महिला विरोधी है किसान-मजदूर भूखमरी के कगार पर पहुँच गया है। प्रदेश का किसान, मजदूर, रोजगार के लिए अन्य प्रदेशों में पलायन को मजबूर है, वहीं पढ़ा लिखा नौजवान रोजगार न मिलने पर अपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हो रहा है। प्रदेश का दुर्भाग्य है प्रदेश के लगभग 5 हजार प्राथमिक विद्यालय बन्द करना व मन्दिरों व धार्मिक मेलों पर सरकारी वजह को बढ़ाना सरकार की अदूरदर्शिता स्पष्ट होती है। दूसरी तरफ पुलिस की निरंकुशता ने प्रदेश के थानें में हो रही बन्दियों की मौत के आकड़ों ने आजादी के बाद के सारे रिकार्ड तोड़ दिये है। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा गरीब, पिछड़े एवं दलित समाज के बच्चों की शिक्षा छीनने की सोची-समझी साजिश के तहत हजारों प्राथमिक विद्यालयों को बंद किया जा रहा है। यह कदम न केवल संविधान की आत्मा के विरुद्ध है, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर के मूल सिद्धांतों का भी उल्लंघन है। साथ ही साथ इन विद्यालयों में कार्यरत हजारों रसोइयाँ जो अधिकांशतः गरीब, विधवा एवम निराश्रित महिलाओं का रोजगार भी संकट में आ गया है। जिससे इन महिलाओं के साथ-साथ उनके बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रह गया। सरकार द्वारा किया गया यह कृत्य महिला सशक्तीकरण की मूल भावना को भी ठेस पहुँचा रहा है।

उक्त अवसर पर अश्वनी सोनी, गुलफाम खान, निसार अहमद, डा.रामबहादुर पटेल, राजकुमारी सरोज, मंजू सिंह, उर्मिला यादव, मनराजी पटेल, आशा कोरी, तहजीब फातमा, संतोष यादव, रमाशंकर यादव, संदीप यादव, विनोद यादव, विपिन सरोज, सुरेश यादव, महेंद्र यादव, सावित खान, मानवेन्द्र पटेल, अहमद अली, अब्दुल हई, देवी लाल, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मनीष पाल सहित अन्य नेतागण उपस्थित रहे।

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