अमेठी। लोकतंत्र में पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिक को सुरक्षा का एहसास कराना और उसकी समस्याओं का समाधान करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। थाने को पीड़ित और परेशान व्यक्ति के लिए उम्मीद का दरवाजा माना जाता है। लेकिन जब इसी दरवाजे पर पहुंचने वाले आम नागरिक को सम्मान और सहज व्यवहार के बजाय उपेक्षा का सामना करना पड़े, तो पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है। काश! अमेठी जनपद के कुछ थाना प्रभारी आम जनता को भी आम नहीं, बल्कि खास समझते। उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते, फरियादियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करते और बिना किसी भेदभाव के उनकी शिकायतों पर कार्रवाई करते, तो निश्चित रूप से पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता और मजबूत होता। अक्सर यह सवाल उठता है कि थाने में पहुंचने वाले व्यक्ति की पहचान उसकी हैसियत से क्यों हो? रसूखदार व्यक्ति के लिए समय निकालना और सामान्य नागरिक को इंतजार कराना आखिर कैसी व्यवस्था का संकेत है? कानून की नजर में सभी नागरिक बराबर हैं। ऐसे में किसी की आर्थिक स्थिति, राजनीतिक पहुंच या सामाजिक प्रभाव के आधार पर व्यवहार में अंतर नहीं होना चाहिए। थाना प्रभारी का पद अधिकार के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है। जनता को डराने या अपने प्रभाव का एहसास कराने से पुलिस की छवि मजबूत नहीं होती, बल्कि पीड़ित की बात धैर्य से सुनने और निष्पक्ष कार्रवाई करने से सम्मान बढ़ता है। पुलिस अधीक्षक से अपेक्षा है कि वह जनपद के थानों की कार्यशैली पर नजर रखें और फरियादियों के साथ होने वाले व्यवहार की समीक्षा करें। याद रखिए, आम जनता ही पुलिस की असली ताकत है। काश! कुछ थाना प्रभारी यह समझ पाते कि आम आदमी को खास समझने से उनकी कुर्सी छोटी नहीं, बल्कि वर्दी का सम्मान और बड़ा होता है।
अमेठीः काश! कुछ थाना प्रभारी आम जनता को आम नहीं खास समझे तो कुछ बात बने...
November 07, 2026
अमेठी। लोकतंत्र में पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिक को सुरक्षा का एहसास कराना और उसकी समस्याओं का समाधान करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। थाने को पीड़ित और परेशान व्यक्ति के लिए उम्मीद का दरवाजा माना जाता है। लेकिन जब इसी दरवाजे पर पहुंचने वाले आम नागरिक को सम्मान और सहज व्यवहार के बजाय उपेक्षा का सामना करना पड़े, तो पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है। काश! अमेठी जनपद के कुछ थाना प्रभारी आम जनता को भी आम नहीं, बल्कि खास समझते। उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते, फरियादियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करते और बिना किसी भेदभाव के उनकी शिकायतों पर कार्रवाई करते, तो निश्चित रूप से पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता और मजबूत होता। अक्सर यह सवाल उठता है कि थाने में पहुंचने वाले व्यक्ति की पहचान उसकी हैसियत से क्यों हो? रसूखदार व्यक्ति के लिए समय निकालना और सामान्य नागरिक को इंतजार कराना आखिर कैसी व्यवस्था का संकेत है? कानून की नजर में सभी नागरिक बराबर हैं। ऐसे में किसी की आर्थिक स्थिति, राजनीतिक पहुंच या सामाजिक प्रभाव के आधार पर व्यवहार में अंतर नहीं होना चाहिए। थाना प्रभारी का पद अधिकार के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है। जनता को डराने या अपने प्रभाव का एहसास कराने से पुलिस की छवि मजबूत नहीं होती, बल्कि पीड़ित की बात धैर्य से सुनने और निष्पक्ष कार्रवाई करने से सम्मान बढ़ता है। पुलिस अधीक्षक से अपेक्षा है कि वह जनपद के थानों की कार्यशैली पर नजर रखें और फरियादियों के साथ होने वाले व्यवहार की समीक्षा करें। याद रखिए, आम जनता ही पुलिस की असली ताकत है। काश! कुछ थाना प्रभारी यह समझ पाते कि आम आदमी को खास समझने से उनकी कुर्सी छोटी नहीं, बल्कि वर्दी का सम्मान और बड़ा होता है।
