- साठगांठ का खेल ! आलीशान मकानों में रह रहे लोगों को थमा दी आपदा राहत की सरकारी राशि
- दोहरा लाभ रू एक ही छत के नीचे पहले से पास हैं कई सरकारी आवास, अब आपदा कोष पर भी मारा डाका
- ग्रामीणों का फूटा गुस्सा रू मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच और रिकवरी की उठाई मांग
प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश में जीरो टॉलरेंस की नीति को ठेंगा दिखाते हुए प्रतापगढ़ के नगर पंचायत कोहंडौर से सरकारी धन की खुली बंदरबांट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। रामापुर और पूरे बैजू वार्ड में पक्के मकानों में रह रहे संपन्न परिवारों ने आपदा प्रबंधन की ₹1,20,000 की धनराशि पर अवैध रूप से हाथ साफ कर दिया। इस महाफर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ जब आक्रोशित ग्रामीणों ने तथ्यों के साथ मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी की चैखट पर न्याय की गुहार लगाई।
शिकायतकर्ता विवेक कुमार, सावित्री, सुशीला, मिट्ठू लाल और आशा देवी समेत दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि गत दिनों हुई भारी बरसात के बाद जिलाधिकारी ने प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया था। आरोप है कि उस वक्त मौके पर मौजूद नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि किशन सोनी, कुछ खास सभासदों और उनके रसूखदार समर्थकों ने मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची। उन्होंने जानबूझकर वार्ड की रिंकी पत्नी हरिओम गौड़, विमला पत्नी बृज लाल पाल और विद्यादेवी के उन जर्जर और खाली पड़े पैतृक खंडहरों की जांच करवा दी, जिनमें बरसों से कोई परिंदा भी नहीं पर मारता।
ग्रामीणों ने दस्तावेजी सबूतों के साथ आरोप लगाया है कि जिन लोगों के नाम पर आपदा राहत राशि जारी हुई है, उनके चमचमाते पक्के मकान ठीक पीछे बने हुए हैं, जिनमें वे सपरिवार रह रहे हैं। इतना ही नहीं, यह परिवार पहले से ही सरकारी योजनाओं का दोहरा लाभ ले रहा है। आरोपी रिंकी के परिजन दीपिका व धन्नो देवी और विमला पाल की बहू के नाम पर पहले से ही सरकारी आवास स्वीकृत हैं, जिसकी मोटी रकम उनके खातों में आ भी चुकी है। इसके बावजूद स्थानीय रसूख और साठगांठ के बल पर आपदा प्रबंधन कोष की धनराशि को ठिकाने लगा दिया गया।
आपदा पीड़ितों का हक मारकर अपात्रों की जेबें भरने के इस खेल से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे सिंडिकेट की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अपात्रों से सरकारी धन की शत-प्रतिशत रिकवरी हो और जांच भटकाने वाले जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
