एनआरसी में कुपोषित बच्चों की भर्ती बढ़ाने पर जोर, मातृ एवं शिशु मृत्यु का होगा अनिवार्य ऑडिट
सोनभद्र, 29 अक्टूबर। मुख्य विकास अधिकारी एवं जिला स्वास्थ्य समिति की उपाध्यक्ष जागृति अवस्थी ने स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और कर्मचारियों की अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अनुपस्थित कर्मचारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने और उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए। साथ ही, कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराने, जननी सुरक्षा योजना के भुगतान में तेजी लाने तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रत्येक मामले का अनिवार्य ऑडिट कराने पर जोर दिया।
गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में सीडीओ ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।
जेएसवाई भुगतान और एएनसी पंजीकरण में तेजी लाने के निर्देश
सीडीओ ने सभी ब्लॉकों को संस्थागत प्रसव के सापेक्ष जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के कम से कम 90 प्रतिशत पात्र लाभार्थियों का भुगतान आगामी बैठक से पहले सुनिश्चित करने को कहा। प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) पंजीकरण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर चतरा, चोपन, दुद्धी और घोरावल के संबंधित अधीक्षकों एवं प्रभारी चिकित्साधिकारियों को चेतावनी दी। उन्होंने निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 90 प्रतिशत से अधिक पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
एनआरसी में कुपोषित बच्चों की भर्ती का लक्ष्य तय
पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों की कम भर्ती पर चिंता जताते हुए सीडीओ ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की प्रत्येक टीम को प्रति सप्ताह कम से कम एक अति कुपोषित (सैम) बच्चे को भर्ती कराने का लक्ष्य दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी माह में किसी टीम द्वारा एक भी बच्चे को भर्ती नहीं कराया गया तो संबंधित टीम का मानदेय रोकने के साथ उसके वाहन को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया जाएगा।
मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रत्येक मामले का होगा ऑडिट
सीडीओ ने जनपद में होने वाली प्रत्येक मातृ एवं शिशु मृत्यु का अनिवार्य ऑडिट कराकर रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मृत्यु के आंकड़ों को छिपाने या समय से सूचना नहीं देने वाले जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
गर्भवती महिलाओं को फोन से दी जाएगी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी
गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सभी ब्लॉकों में कॉल सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए गए। इनके माध्यम से गर्भावस्था के सातवें, आठवें और नौवें माह में महिलाओं को फोन कर पोषण, प्रसव पूर्व जांच और संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूक किया जाएगा। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं से नियमित संपर्क कर उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
पांच नवंबर तक तैयार होगी पल्स पोलियो अभियान की कार्ययोजना
परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत विशेष शिविर आयोजित कर महिला एवं पुरुष नसबंदी कार्यक्रमों में तेजी लाने तथा अस्थायी गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। आगामी पल्स पोलियो अभियान के लिए सभी ब्लॉकों को पांच नवंबर 2026 तक बैठक कर अंतिम कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
टीबी मरीजों को पोषण पोटली देने और आभा आईडी बनाने पर जोर
क्षय रोग उन्मूलन अभियान के तहत जनपद एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को कम से कम एक-एक क्षय रोगी को गोद लेकर उसे पोषण पोटली वितरित करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा जन्म-मृत्यु पंजीकरण में नवजात बच्चियों एवं महिलाओं के पंजीकरण को प्राथमिकता देने और स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की आभा आईडी बनवाने पर जोर दिया गया।
सीडीओ जागृति अवस्थी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, एमसीएच विंग के चिकित्सा अधीक्षक, अपर एवं उप मुख्य चिकित्साधिकारी, वित्त एवं लेखा अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा सभी ब्लॉकों के प्रभारी चिकित्साधिकारी उपस्थित रहे।
