पश्चिम बंगाल और ओडिशा में GPIL के कई ठिकानों पर ED रेड
October 11, 2026
ED के कोलकाता ज़ोनल ऑफ़िस-II ने PMLA 2002 के तहत 5 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल और ओडिशा में M/s गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (GPIL), उससे जुड़ी कंपनियों और उसके मैनेजमेंट से जुड़े लोगों के 9 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया. यह कार्रवाई GPIL द्वारा किए गए बैंक फ्रॉड की जांच के सिलसिले में की गई.
तलाशी के दौरान PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत कई आपत्तिजनक दस्तावेज़/डिवाइस/रिकॉर्ड मिले और ज़ब्त किए गए. PMLA 2002 के प्रावधानों के तहत GPIL से जुड़े कुल 139 बैंक अकाउंट और GPIL व उससे जुड़े व्यक्तियों के नाम पर मौजूद कई म्यूचुअल फंड और शेयर फ्रीज कर दिए गए हैं. इसके अलावा 3 महंगी कारें (2 मर्सिडीज़ और 1 BMW) भी फ़्रीज़ की गई हैं. ज़ब्त की गई चीज़ों और वित्तीय लेन-देन की अभी जांच चल रही है.
ED की जांच CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी. M/s GPIL पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड कंपनी है और इसका कॉर्पोरेट ऑफ़िस भुवनेश्वर, ओडिशा में है और देश भर में इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जो केबल, कंडक्टर, तार और उससे जुड़े उत्पादों के निर्माण और सप्लाई का काम करते हैं. कंपनी ने बैंकों के एक कंसोर्टियम (जिसमें केनरा बैंक लीड बैंक था) से बड़ी मात्रा में फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड वर्किंग-कैपिटल सुविधाएं ली थीं.
कंसोर्टियम का कुल एक्सपोज़र लगभग ₹3,590 करोड़ था, जिसमें केनरा बैंक का मंज़ूर किया गया एक्सपोज़र लगभग ₹1,174 करोड़ शामिल था. ED ने अक्टूबर 2018 से सितंबर 2023 की अवधि के लिए खातों और विभिन्न वित्तीय दस्तावेजों की जांच की. इससे पता चला कि गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (GPIL) ने कथित तौर पर अपनी 'ड्राइंग पावर' और उधार लेने की क्षमता में हेरफेर किया. कंपनी ने बैंकों को बताए गए स्टॉक को अपने ऑडिट किए गए वित्तीय विवरणों में दिखाए गए स्टॉक की तुलना में काफी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया.
GPIL द्वारा बताई गई प्राप्तियों में लगभग ₹115.15 करोड़ की बड़ी विसंगति भी देखी गई, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनी ने अपनी चालू संपत्तियों (current assets) को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और नतीजतन उधार लेने की सीमा बढ़ाई. फोरेंसिक ऑडिट से पता चला है कि फिक्स्ड एसेट्स के बताए गए मूल्य में काफी वृद्धि हुई है. यह लगभग ₹211.36 करोड़ से बढ़कर ₹493.39 करोड़ हो गया है. इसमें लगभग ₹298.98 करोड़ का पुनर्मूल्यांकन शामिल है, जिसके लिए कोई सहायक मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन रिपोर्ट मौजूद नहीं थी.
GPIL ने कथित तौर पर वित्त वर्ष 2021-22 की अपनी बैलेंस शीट में लगभग ₹80 करोड़ की 'परचेज-बिल डिस्काउंटिंग सुविधा' का खुलासा नहीं किया. फोरेंसिक ऑडिट में ऐसे लेनदेन की भी पहचान की गई, जिनसे जुड़े संगठनों को फंड डायवर्ट (धन का गलत इस्तेमाल) किए जाने की संभावना का संकेत मिलता है. साथ ही, बताई गई प्राप्तियों और वास्तविक सामग्री की खपत के बीच महत्वपूर्ण विसंगतियां, और बताई गई प्राप्तियों (receivables) व देय राशियों (payables) में भारी वृद्धि भी पाई गई.
इन सभी निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि स्टॉक, प्राप्तियों और संपत्ति के मूल्यों को व्यवस्थित रूप से गलत तरीके से पेश किया गया, उधार को छिपाया गया और फंड का संभावित डायवर्जन व रोटेशन किया गया. इस तरह GPIL ने अपनी वित्तीय स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया. इस मामले में अभी आगे की जांच जारी है.
