दिग्गज कांग्रेसी छत्रप प्रमोद की बेटी को लेकर यूपी में कार्यकर्ताओं में नये उत्साह का संचार, भरोसे की शुरू हुई पारी
प्रतापगढ़। कांग्रेस हाईकमान द्वारा उत्तर प्रदेश में खोई जमीन को वापस लाने के लिए विधानसभा चुनाव के ठीक पहले जिले की रामपुर खास की विधायक आराधना मिश्रा मोना के ऊपर दारोमदार सौंपा है। शीर्ष नेतृत्व ने नौ बार के यूपीे के कांग्रेस विधायक रहे और मौजूदा समय में राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा मोना पर यह भरोसा सोंच समझकर उठाया है। रविवार को लखनऊ के नेहरू भवन में अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने के बाद आराधना मिश्रा मोना का कार्यकर्ताओं के लिए स्वागत नहीं संघर्ष का श्लोगन एलओपी राहुल गॉधी के देश व्यापी संघर्ष के शंखनाद को यूपी के कांग्रेसियों में नये उत्साह का जोश भी भर गया है। शीर्ष नेतृत्व को मोना को प्रदेश कांग्रेस की बागडोर सौंपने से प्रमोद तिवारी का भी यूपी में बने जनाधार का सीधे लाभ का आकलन समझ में आया है। वहीं तीन बार की कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश कांग्रेस की टीम तैयार करने की भी नेतृत्व द्वारा हरी झंडी मिलना पूरी तरह से प्रमोद तिवारी व मोना पर पार्टी का एतबार झलकता देखा जा रहा है। नई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में आराधना मिश्रा मोना ने अपनी टीम में सहारनपुर के पार्टी सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष चयनित कराकर अल्पसंख्यक वोटर्स को पार्टी के प्रति पहले के भरोसे की वापसी का जतन किया है। वहीं दो वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में देवेन्द्र निषाद तथा आलोक प्रसाद को जगह दिलाकर दलित तथा पिछड़े वर्ग के मतदाताओं पर भी आराधना मिश्रा मोना की पैनी नजर झलकती है। वहीं कांग्रेस विधानमण्डल दल के नेता के पद पर उत्तराधिकारी का चयन भी आराधना मिश्रा मोना ने बड़ी सूझबूझ के साथ किया है। महराजगंज फरिंदा से पार्टी विधायक चैधरी वीरेन्द्र सिंह को अपनी जगह सीएलपी नेता नामित कराकर मोना ने जातीय समीकरण को भी साधा है। कांग्रेस संगठन सृजन अभियान से जुड़ी विधायक आराधना मिश्रा मोना का बूथ स्तर से लेकर प्रदेश इकाई के संगठन को धार देने में की गयी मेहनत और बनायी गई रूपरेखा से वह प्रियंका गांधी के और करीब पहुंचती देखी गयी। संगठन सृजन अभियान के तहत विधायक मोना का फोकस संगठन के पायदान को आम मतदाताओं के बीच खड़ा करना शीर्ष प्राथमिकता में गिना जा रहा है। प्रतापगढ़ सियासी क्षेत्र में हर समय मजबूत भूमिका में देखा गया है। एक समय प्रतापगढ़ में सात की सातों विधानसभा सीट पर कांग्रेस का दबदबा देखा जाता था। कांग्रेस से विधायक रहे नियाज हसन विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं। आराधना मिश्रा मोना का पारिवारिक तानाबाना मजबूत कांग्रेस संस्कृति का भी परिचायक है। पिता प्रमोद तिवारी पार्टी के झंडे बैनर से विधानसभा से राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता तक का सफर तय कर चुके हैं। वहीं मोना के दादा पं. सरयू प्रसाद तिवारी कांग्रेस से जिले की जिला पंचायत बोर्ड में अंतरिम अध्यक्ष रह चुके हैं। मोना के बेटे राघव की भी इधर रामपुर खास में युवाओं के बीच बढ़ती गतिविधि इस परिवार से चैथी पीढ़ी का भी कांग्रेस के प्रति रूझान आंका जा रहा है। प्रतापगढ़ में इससे पहले पं. मुनीश्वरदत्त उपाध्याय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के साथ साथ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं। मोना के दादा सरयू प्रसाद तिवारी का भी स्वतंत्रता संग्राम एवं किसान आन्दोलन से गहरा नाता रहा है। ऐसे में कांग्रेस ने आराधना मिश्रा मोना के नाम पर अध्यक्षी की मोहर लगाकर एक बार फिर प्रतापगढ़ के स्वतंत्रता आन्दोलन तथा किसान आन्दोलन में कांग्रेस के खून के रंग को गाढा भी करने का संकेत दिया है। प्रमोद तिवारी की भी पार्टी में कदर व बढ़ता प्रभाव इसलिए भी खास जगह रखता है कि वह कांग्रेस शासनकाल में प्रदेश के कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे। वहीं कांग्रेस के लम्बे विपक्ष कार्यकाल में भी प्रमोद तिवारी कांग्रेस व नेतृत्व के प्रति अडिग निष्ठा के प्रतीक माने जाते हैं। आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर आसीन होता देख प्रतापगढ़ के राजनैतिक उम्मीद को लेकर भी चर्चा कुछ खास छिड़ी हुई है। एक तपके का मानना है कि यदि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ तो गठबंधन की स्थिति में नई सरकार में आराधना मिश्रा मोना की एक मजबूत भूमिका जिले को खास मुकाम की ओर बढ़ा सकेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद आराधना मिश्रा मोना को लेकर जिले के कांग्रेसियों का उत्साह भी कुछ खास चरम पर आ पहुंचा है। एलओपी राहुल गॉधी तथा प्रियंका गॉधी व राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे के वोट चोरी के देश व्यापी संघर्ष के माहौल में आराधना मिश्रा मोना का सादगी के साथ प्रदेश अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करना भी कार्यकताओं का मनोबल ऊॅचा कर गया है। वहीं मोना के इस कदम से यूपी की सियासत में भाजपा की भी बोलती बन्द करा गया है।
