चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
October 05, 2026
चेक बाउंस के 7 मामलों में दोषी अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट के पिछले आदेश के मुताबिक आज राजपाल को कम से कम 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट पेश करना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. जजों ने कहा कि उनके आचरण से कोर्ट के प्रति सम्मान नजर नहीं आता. कोर्ट ने राजपाल को एक और मौका देते हुए बुधवार को अगली सुनवाई की बात कही है.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राजपाल यादव की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. 10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें 3 महीने की जेल और सभी 7 मामलों में 1.35 करोड़ रुपये जुर्माने की सजा दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को राजपाल यादव को जेल जाने से अंतरिम राहत देते हुए 5 करोड़ रुपये अपनी रजिस्ट्री में जमा करने की शर्त रखी थी. 15 सितंबर को उन्होंने कहा कि वह कुछ संपत्तियों को बेच कर रकम जुटा रहे हैं. अगली सुनवाई में वह 2 करोड़ रुपए का ड्राफ्ट कोर्ट को सौंपेंगे. इसके बाद कोर्ट ने उनकी अंतरिम राहत को 5 अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दिया था.
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की कॉपी अदालत में पेश की. इस पर बेंच ने सवाल उठाया कि जब 5 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश था तो सिर्फ 50 लाख रुपये क्यों? कोर्ट ने कहा कि उन्हें दो सप्ताह का समय दिया गया था और अब वह समय समाप्त हो चुका है.
जस्टिस जोयमाल्या बागची ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “आपकी जगह जेल में है.” उन्होंने कहा, "आपके टालमटोल भरे रवैये को यह सोचकर नजरअंदाज किया जा रहा था कि शिकायतकर्ता को कुछ रकम मिल सकेगी. अब आपकी याचिका को खारिज करने पर विचार किया जाएगा."
राजपाल यादव के वकील ने 50 लाख के अंतरिम भुगतान को सही ठहराते हुए कहा कि शिकायतकर्ता गरीब नहीं हैं. इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कोर्ट ने कहा, "वह कम से कम उतने गरीब ज़रूर हैं, उनकी जितनी रकम आपने दबा रखी है. हम इस तरह के घमंड का इलाज करना जानते हैं. आप यहां भी अभिनय कर रहे हैं. पर यह काम नहीं आएगा."
यह मामला साल 2010 का है. फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी प्रोडक्शन कंपनी को करीब 5 करोड़ रुपये का लोन दिया था. फिल्म की रिलीज में देरी के बाद पैसे लौटाने को लेकर समझौता हुआ, लेकिन कंपनी को दिए गए 7 चेक बाउंस हो गए.
इसके बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया. अप्रैल 2018 में ट्रायल कोर्ट और 2024 में सेशंस कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया.
