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आज के भारत में इलेक्शन चुराए जा रहे हैं-सौरव दास


कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने बंगाल में हो रहे उपचुनाव को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पुलिस और तृणमूल के दलबदलुओं की मदद से बीजेपी नंदीग्राम में जीत हासिल करने की कोशिश में है. सोशल मीडिया प्लेफॉर्म एक्स पर इस पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए सौरव दास ने कहा, 'ज्ञानेश कुमार का ट्रैक रिकॉर्ड यही रहा है. ऐसे चुनाव जो न तो स्वतंत्र थे और न ही निष्पक्ष. रिपोर्ट से पता चलता है कि आज के भारत में चुनाव कैसे चुराए जा रहे हैं. अब बहुत हो चुका.'

नंदीग्राम और रेजीनगर में मंगलवार (6 अक्टूबर 2026) को होने वाला मतदान महज दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 15 साल के शासन का अंत कर सत्ता में आई बीजेपी के लिए यह पहला चुनावी परीक्षण है. साथ ही, इन उपचुनावों से ये भी संकेत मिलने की उम्मीद है कि बिखरे हुए विपक्ष में कौन-सी पार्टी बीजपी के सामने प्रमुख चुनौती के रूप में उभर सकती है. इन उपचुनावों से मई में सत्ता संभालने के बाद बीजेपी सरकार के प्रति मतदाताओं की शुरुआती प्रतिक्रिया का अंदाजा मिलेगा.

नंदीग्राम का चुनाव राजनीतिक रूप से अधिक प्रतीकात्मक महत्व रखता है. नंदीग्राम वह क्षेत्र है, जो ममता बनर्जी के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का केंद्र रहा था. इस आंदोलन ने 2011 में तृणमूल के सत्ता में आने का रास्ता तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी. 2021 में बंगाल के मौजूदा सीएम शुभेंदु अधिकारी ने इसी सीट पर ममता बनर्जी को हराया था. शुभेंदु ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत हासिल की थी और मुख्यमंत्री बनने के बाद भवानीपुर सीट बरकरार रखी, जिसके कारण नंदीग्राम में उपचुनाव की जरूरत पड़ी.

बीजेपी ने चंद्रनाथ रथ की मां हासिरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है. चंद्रनाथ, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे. विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के दो दिन बाद छह मई को चंद्रनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल धड़े की उम्मीदवार संचित प्रधानी डे ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नाम वापस ले लिया. इसके बाद ममता बनर्जी के पास अपना कोई उम्मीदवार नहीं बचा और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन किया. उन्होंने इसे इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश बताया.

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