संग्रामपुर/अमेठी। एक ओर किसानों की धान की फसल तैयार है, तो दूसरी ओर रबी की बुवाई के लिए डीएपी खाद की जरूरत है। लेकिन संग्रामपुर क्षेत्र में किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। धान खरीद के लिए चयनित चारों सहकारी समितियों पर ताला लटकने से किसान परेशान हैं। सरकारी क्रय केंद्र बंद होने के कारण जहां किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कत हो रही है, वहीं डीएपी खाद की उपलब्धता को लेकर भी उन्हें भटकना पड़ रहा है। ऐसे में किसानों के सामने खेती-किसानी का संकट गहराता नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार, अमेठी जिले के संग्रामपुर क्षेत्र में धान खरीद के लिए चार सहकारी समितियों का चयन किया गया है। इनमें गोरखापुर, भावलपुर, मिश्रौली और राजापुर अमेरुआ स्थित समितियां शामिल हैं। किसानों को उम्मीद थी कि इन केंद्रों पर धान की सरकारी खरीद शुरू होने से उन्हें अपनी उपज बेचने में सहूलियत मिलेगी और उचित मूल्य मिल सकेगा। लेकिन केंद्रों पर ताला लटकने से उनकी उम्मीदों को झटका लगा है। हैरानी की बात यह है कि जिलाधिकारी की ओर से धान खरीद के दौरान किसानों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से किसान सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक अपनी शिकायत दर्ज कराकर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन की ओर से किसानों की समस्याओं के समाधान की व्यवस्था किए जाने के बावजूद संग्रामपुर क्षेत्र के चारों धान क्रय केंद्र बंद रहने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब खरीद केंद्र ही नहीं खुलेंगे, तो किसान अपनी उपज बेचने के लिए कहां जाएंगे? धान खरीद के साथ ही किसानों के सामने रबी की बुवाई का संकट भी खड़ा है। क्षेत्र के भवसिंहपुर, संग्रामपुर, सोनारी कनू, कनू और नेवादा कनू समेत दर्जनों गांवों के किसान डीएपी खाद के लिए परेशान बताए जा रहे हैं। किसानों के मुताबिक, पिछले बुवाई के सीजन में ब्लॉक मुख्यालय के पास डीएपी खाद उपलब्ध हो जाती थी, लेकिन इस बार केंद्र बंद रहने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। धान की फसल तैयार होने के बावजूद सरकारी क्रय केंद्रों पर ताला लटकने से किसानों के सामने उपज बेचने का संकट है। ऐसे में कुछ किसानों को अपनी मेहनत की कमाई व्यापारियों के हाथों बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों को आशंका है कि समय पर सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई, तो उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। अब किसानों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। जरूरत है कि संबंधित अधिकारी बंद पड़े क्रय केंद्रों की स्थिति स्पष्ट करें, धान खरीद की व्यवस्था सुचारु कराएं और डीएपी खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करें, ताकि अन्नदाताओं को खेती के इस महत्वपूर्ण दौर में अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
कहीं धान बेचने की चिंता तो कहीं डीएपी खाद के लिए भटक रहे अन्नदाता, सरकारी व्यवस्था पर उठे सवाल
