लखनऊ। प्राचीन श्री लेटे हुए हनुमान जी मंदिर, पंचवटी घाट, चैक, लखनऊ में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास परम पूज्य स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने श्रीराम वनवास, केवट की भक्ति, भरत चरित्र एवं चित्रकूट में राम-भरत मिलन के अत्यंत भावपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति और भावनाओं में डूबे नजर आए।स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने कहा कि “परमात्मा जब कृपा करते हैं तो वे संपत्ति नहीं, बल्कि सत्संग प्रदान करते हैं।” उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में संगति का अत्यंत महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। सत्संग व्यक्ति के जीवन को परमात्मा की ओर ले जाता है, जबकि कुसंग जीवन में पतन और अशांति का कारण बन सकता है।राम वनवास प्रसंग का वर्णन करते हुए स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने बताया कि कैकेयी को मंथरा के कुसंग ने किस प्रकार प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप अयोध्या में आनंद का वातावरण शोक में बदल गया। श्रीराम के वनवास के निर्णय ने न केवल अयोध्यावासियों को व्यथित किया, बल्कि महाराज दशरथ के जीवन को भी गहरे दुःख में डाल दिया।
उन्होंने कहा कि कुसंग व्यक्ति के विवेक को प्रभावित कर सकता है, इसलिए जीवन में संगति का चयन अत्यंत सावधानी से करना चाहिए। परिवार और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने आसपास के वातावरण एवं संगति के प्रति सजग रहना चाहिए।श्रीराम और केवट के मिलन एवं केवट की निष्काम भक्ति का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान के प्रति सच्चे प्रेम और समर्पण के लिए धन-संपत्ति नहीं, बल्कि निष्कपट हृदय और श्रद्धा आवश्यक है।स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने भरत चरित्र के माध्यम से परिवार में भाई-भाई के प्रति प्रेम, त्याग, समर्पण और मर्यादा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि परिवार, समाज और जीवन संचालन की आदर्श संहिता है।कथा के दौरान चित्रकूट में श्रीराम और भरत के मिलन का प्रसंग अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। राम और भरत के परस्पर प्रेम, त्याग एवं समर्पण का वर्णन सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। पूरे कथा पंडाल में भावुक एवं भक्तिमय वातावरण बन गया।
कथा संयोजक डॉ. पंकज सिंह भदौरिया ने बताया कि माता गोमती का जलस्तर लगातार बढ़ने के बावजूद श्रीराम कथा में श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था और प्रभु श्रीराम के प्रति भक्ति ही इस आयोजन की सबसे बड़ी शक्ति है। इस अवसर पर कथा व्यवस्थापक संजीव अग्रवाल, उषा अग्रवाल. गरिमा टंडन दीपक अग्रवाल, ऋद्धि गौड़ अलकेश सोती रूबी राज सहित मंदिर प्रबंधन, आयोजन समिति के सदस्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
