लखनऊ।विकास के दावे और स्मार्ट शहर के तमाम हसीन वादे तब कागजी साबित होने लगते हैं, जब जनता बुनियादी समस्याओं के दलदल में फंस जाती है। आलमबाग के सुजानपुरा इलाके में इस वक्त कुछ ऐसा ही हाल है, जहां एलडीए और नगर निगम की आपसी खींचतान और एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने की जिद ने स्थानीय दुकानदारों और रहवासियों का जीना मुहाल कर दिया है
एक महीने से जनता अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुकी है, लेकिन विभागों की कार्यशैली का श्सीवरश् ऐसा जाम है कि साफ होने का नाम ही नहीं ले रहा !
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा इलाके में सीसी रोड का निर्माण कराया गया। सड़क तो बन गई, लेकिन निर्माण के दौरान बरती गई लापरवाही का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। सीसी रोड बनते ही इलाके के सीवेज टैंक पूरी तरह से ब्लॉक हो गए। नतीजा यह है कि अंडरग्राउंड पाइपलाइन चोक होने के कारण गंदा और बदबूदार सीवर का पानी अब सीधे उफनकर सड़कों और मार्केट की दुकानों के अंदर घुस रहा है।
सुजानपुरा मार्केट के दुकानदारों का हाल बद से बदतर हो गया है। दुकानों के भीतर सीवर का गंदा पानी भरने से व्यापारियों का सामान खराब हो रहा है और ग्राहकों ने उस रास्ते से निकलना ही बंद कर दिया है। एक तरफ जहां त्योहारी सीजन और रोजमर्रा के व्यापार से लोग अपनी आजीविका चलाते हैं, वहीं दूसरी तरफ जलभराव और सड़ती गंदगी के बीच सांस लेना भी दूभर हो गया है। हालात इतने भयानक हैं कि लोग संक्रामक बीमारियों के फैलने के साए में जीने को मजबूर हैं।
सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि जनता जब अपनी गुहार लेकर नगर निगम के दरवाजे पर पहुंचती है, तो वहां के जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से साफ पल्ला झाड़ लेते हैं। निगम के नुमाइंदों का रटा-रया जवाब होता हैकृ ष्सड़क एलडीए ने बनाई है, इसलिए सीवर और टैंक की समस्या भी वही देखें।ष्
सवाल यह उठता है कि दो सरकारी विभागों (एलडीए और नगर निगम) के बीच फाइलों के खेल और आपसी आरोप-प्रत्यारोप की इस जंग में आखिर जनता पिसती क्यों रहे? क्या आम नागरिक सिर्फ टैक्स देने और प्रशासनिक उदासीनता का दंश झेलने के लिए पैदा हुए हैं ?
एक महीने से दौड़-दौड़कर बेहाल हो चुकी जनता अब गुस्से में है। अगर समय रहते इन दोनों विभागों के अहं की लड़ाई खत्म नहीं हुई और सीवर सफाई का काम शुरू नहीं हुआ, तो जनता का यह गुस्सा कभी भी बड़े प्रशासनिक विरोध प्रदर्शन के रूप में फूट सकता है।
