लखनऊ में 22 अक्टूबर को प्रस्तावित किसान महापंचायत से पहले किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं को नजरबंद किए जाने पर जताई नाराजगी
मेरठ/मवान। भारतीय किसान यूनियन संघर्ष मोर्चा के जिलाध्यक्ष मेरठ ठाकुर नवनीत चैहान ने 22 अक्टूबर को लखनऊ में प्रस्तावित किसान महापंचायत को लेकर किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं को कथित रूप से नजरबंद किए जाने की कार्रवाई का कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और इस अधिकार को दबाने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ठाकुर नवनीत चैहान ने कहा कि किसान महापंचायत किसानों की समस्याओं, उनके अधिकारों और जायज मांगों को उठाने का एक महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे में महापंचायत में शामिल होने की तैयारी कर रहे किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं को नजरबंद किए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई के जरिए किसान आंदोलन को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान निकालना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय यदि उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जाएगी, तो इससे किसानों में नाराजगी बढ़ सकती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक और संगठन को अपनी जायज मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने का अधिकार मिलना चाहिए।
जिलाध्यक्ष ठाकुर नवनीत चैहान ने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान यूनियन संघर्ष मोर्चा किसानों के हक, सम्मान और हितों की लड़ाई जारी रखेगा। किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाता रहेगा और उनकी जायज मांगों को लेकर आवाज बुलंद की जाएगी।
उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं की अनदेखी करना उचित नहीं है। किसान संगठनों की मांगों को सुनकर उनका समाधान निकालने के लिए संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए, ताकि किसानों को अपनी समस्याएं रखने के लिए संघर्ष न करना पड़े।
उन्होंने दोहराया कि किसानों के अधिकारों और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर संगठन पीछे नहीं हटेगा तथा किसानों की आवाज को मजबूती से उठाता रहेगा।
