- रेलवे पेंशनर, पक्के मकान और ट्रकों के मालिकों को बना दिया गरीब
- परसूपुर के अमर बहादुर ने जिलाधिकारी से की शिकायत, दो आवास आईडी उजागर कर खोली पोल
प्रतापगढ़। सरकार भले ही हर गरीब को पक्की छत देने का दम भर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की दीमक इस योजना को खोखला कर रही है। जनपद के मंगरौरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा परसूपुर में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना में एक ऐसा ही सनसनीखेज फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां रईसों और संपन्न परिवारों को कागजों पर श्गरीबश् दिखाकर सरकारी मकान बांटे जा रहे हैं। इस महाघोटाले के खिलाफ गाँव के ही सजग नागरिक अमर बहादुर यादव ने जिलाधिकारी को साक्ष्यों के साथ शिकायती पत्र भेजकर जांच की मांग की है।
जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्र में शिकायतकर्ता अमर बहादुर यादव ने सीधे तौर पर दो आवास आईडी (177784492 तथा यूपी-44-011-030-002ध्1073) का कच्चा चिट्ठा खोला है। आरोप है कि जिस लाभार्थी को योजना का लाभ दिया जा रहा है, उसका परिवार बेहद संपन्न है। लाभार्थी के पति रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी थे, जिनकी मृत्यु के बाद परिवार को हर महीने मोटी पेंशन मिलती है। इतना ही नहीं, परिवार के पास पहले से ही आलीशान पक्का मकान और भारी मात्रा में कृषि योग्य भूमि है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अपात्र लाभार्थी के तीन बेटे हैं, जो न सिर्फ आधुनिक सुख-सुविधाओं (कूलर, अपाची व हीरो होंडा शाइन जैसी मोटरसाइकिलें) का आनंद ले रहे हैं, बल्कि व्यवसाय के तौर पर ट्रक और भारी ट्रेलर भी चलवाते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि मंगरौरा ब्लॉक के नोडल अधिकारी और संबंधित आवास कर्मियों को इस संपन्नता की पूरी जानकारी है। इसके बावजूद, कथित तौर पर भारी श्सुविधा शुल्कश् (रिश्वत) की मलाई खाकर अधिकारियों ने अपात्रों को पात्रता का सर्टिफिकेट बांट दिया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) की मिलीभगत से अपात्रों की फाइलें तैयार की जा रही हैं। इस भ्रष्टाचार के कारण गाँव के असली हकदार, अत्यंत निर्धन और बेसहारा लोग आज भी टूटी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। अमर बहादुर यादव ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इन दोनों विवादित आवासों के आवंटन को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और इस पूरे नेक्सस (भ्रष्टाचार के खेल) में शामिल अधिकारियों व बिचैलियों पर मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
