निर्वाचक नामावली से संबंधित झूठी घोषणा करने वालों पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई- जिला निर्वाचन अधिकारी
अमेठी। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के क्रम में जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी शशांक चैधरी ने आम नागरिकों को निर्वाचक नामावली से संबंधित प्रावधानों के प्रति जागरूक करते हुए बताया कि मतदाता सूची की तैयारी, पुनरीक्षण अथवा संशोधन के दौरान जानबूझकर गलत बयान या घोषणा करना दंडनीय अपराध है। जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश लखनऊ के निर्देश के क्रम में निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को यह पता चलता है कि किसी व्यक्ति ने झूठी या भ्रामक शिकायत की है, तो संबंधित आवेदक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति निर्वाचक नामावली की तैयारी, पुनरीक्षण या संशोधन के संबंध में अथवा किसी प्रविष्टि को शामिल करने या हटाने के संबंध में ऐसा बयान या घोषणा करता है, जिसे वह झूठा जानता है या जिसके सत्य होने पर उसे विश्वास नहीं है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने नागरिकों से अपील की कि मतदाता सूची से संबंधित सभी आवेदन, शिकायतें एवं घोषणाएं सही तथ्यों और प्रमाणिक जानकारी के आधार पर ही प्रस्तुत करें। निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक नागरिक का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भी निर्देशित किया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशों एवं कानूनी प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि आमजन नियमों के प्रति जागरूक रहें और निर्वाचन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गलत जानकारी न दी जाए।
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