- भागीदारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सक्रियता से प्रजापति समाज की राजनीति में बढ़ी हलचल
- ओमप्रकाश राजभर से पुराना राजनीतिक जुड़ाव; अतिपिछड़े वर्गों की हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व को लगातार उठाते रहे हैं दोनों नेता
विधान केसरी न्यूज नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अतिपिछड़े वर्गों की हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व का सवाल एक बार फिर चर्चा में है। भागीदारी पार्टी (पी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेमचंद प्रजापति ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की। मुलाकात की तस्वीर भी सामने आई है। हालांकि इस मुलाकात में हुई विस्तृत बातचीत का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसे प्रजापति समाज और अन्य अतिपिछड़े वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की चल रही बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है।
प्रेमचंद प्रजापति और ओमप्रकाश राजभर का राजनीतिक संपर्क नया नहीं है। पूर्व के चुनावी दौर में प्रेमचंद प्रजापति की भागीदारी पार्टी (पी), ओमप्रकाश राजभर के नेतृत्व वाले भागीदारी संकल्प मोर्चे का हिस्सा रह चुकी है। वर्ष 2021-22 की राजनीतिक गतिविधियों से संबंधित प्रकाशित रिपोर्टों में दोनों नेताओं के राजनीतिक सहयोग का उल्लेख मिलता है।
ओमप्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़े और अतिपिछड़े वर्गों के मुद्दों को लंबे समय से उठाते रहे हैं। सरकार में रहते हुए भी उन्होंने पूर्व में पिछड़े वर्गों की हिस्सेदारी और उपेक्षा से जुड़े सवाल सार्वजनिक मंचों पर उठाए थे। 2018 में प्रयागराज में आयोजित एक कार्यक्रम में भी राजभर के साथ प्रेमचंद प्रजापति की मौजूदगी दर्ज की गई थी।
प्रजापति समाज में संगठन विस्तार पर जोर
प्रेमचंद प्रजापति का राजनीतिक इतिहास भले ही कई पुराने क्षेत्रीय नेताओं जितना लंबा न हो, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपनी पार्टी के माध्यम से संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाई हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि सामाजिक घटनाओं, दुर्घटनाओं तथा पारिवारिक कार्यक्रमों में व्यक्तिगत रूप से पहुंचने की उनकी कार्यशैली से प्रजापति समाज के बीच उनका संपर्क बढ़ा है।
भागीदारी पार्टी के संगठन में राष्ट्रीय महासचिव महेश प्रजापति को भी महत्वपूर्ण भूमिका में देखा जाता है। पार्टी से जुड़े लोगों के अनुसार, संगठन विस्तार से लेकर कार्यक्रमों की तैयारी तक दोनों नेता मिलकर सक्रिय रहते हैं।
सभी दलों की नजर अतिपिछड़े मतदाताओं पर
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस सहित विभिन्न दल पिछड़े और अतिपिछड़े वर्गों के बीच अपना आधार बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में प्रजापति समाज को कितना राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलता है, यह भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण विषय रहेगा।
प्रजापति समाज के वास्तविक राज्यव्यापी वोट प्रतिशत का कोई नवीन आधिकारिक जातिवार चुनावी आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए किसी निश्चित प्रतिशत का दावा सावधानी से किया जाना चाहिए। राजनीतिक दलों के टिकट वितरण और संगठनात्मक पदों से यह अधिक स्पष्ट होगा कि समाज को व्यावहारिक रूप से कितनी हिस्सेदारी दी जाती है।
फिलहाल मुख्यमंत्री से ओमप्रकाश राजभर के साथ प्रेमचंद प्रजापति की मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में उनकी सक्रियता को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह संपर्क केवल राजनीतिक शिष्टाचार तक सीमित रहता है या प्रजापति एवं अन्य अतिपिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व से जुड़े किसी बड़े राजनीतिक समीकरण की ओर बढ़ता है।
