अमित कुमार मिश्र
प्रतापगढ़। जनपद मुख्यालय से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मकुनपुर अंचल के पुरेकोलाहल गांव में अवधविहारी पांडेय जी के कुशल संयोजन में ईश्वर व पूर्वजों की असीम कृपा व कुलगुरु श्री निवास त्रिपाठी व कुल पुरोहित श्री गोविंद तिवारी जी के आशीष व प्रेरणा से मुख्य यजमान शीला पांडेय एवं प्रमोद कुमार पांडेय व सह यजमान कल्पना पांडेय एवं विनोद कुमार पांडेय जी को अपने आवास पर आयोजित साप्ताहिक कथा ज्ञान यज्ञ कराने का सुअवसर प्राप्त हुआ। साप्ताहिक कथा में कथा व्यास के रूप में अयोध्या धाम से पधारे कथाव्यास जगतगुरू रामानंदाचार्य स्वामी जी श्रीराम दिनेशाचार्य जी महाराज हरिधाम पीठ गोपाल पीठाधीश्वर रामघाट, श्रीराम घाट अयोध्या धाम जी के श्री मुख से कथा श्रवण करने सौभाग्य प्राप्त हुआ। कथा के अंतिम दिवस मंगलवार को श्री कथाव्यास जी ने सुदामा चरित्र का विस्तार पूर्वक वर्णन करते हुए सुदामा चरित्र को आदर्श व सुदामा को सच्चा मित्र बताया। श्री महाराज जी ने बताया कि श्रीकृष्ण अपने मित्र सुदामा के बदौलत ही द्वारिकाधीश बने। मुट्ठी भर श्रापित चने को सुदामा जी ने खुद खा लेना उचित समझा ,लेकिन अपने मित्र प्रभु श्रीकृष्ण जी को नहीं खिलाया इसलिए कि मेरा मित्र कहीं गरीब व निर्धन न हो जाये। उन्होंने आज के दौर में मजाक बनाने वाले सुदामा चरित्र की निंदा करते हुए कहा कि आजकल लोग कथा पांडाल में सुदामा चरित्र का मजाकिया स्वरूप देखने के मिलता है,जिन्हें कोई धक्का मारता है,कोई गरीब कहता है,कोई दस रुपये देता है तो कोई कुछ देता है। विदित हो कि सुदामा चरित्र महान चरित्र व मित्र है। उनके जैसा आदर्श मित्र शायद कोई हो। उन्होंने कथा के दौरान कई मार्मिक व जीवनोपयोगी दृष्टांत बताया जिसके अनुकरण मात्र से व्यक्ति व परिवार आदर्श बन सकता है। उन्होंने राजा नृग के चरित्र व वर्णन किया कि उसने अपने दिए दान को वापस ले लिया था, जिसकी वजह से वो गिरगिट बन गया था। जबकि वो महादानी कहलाता था। जिसने बहुत गायों का दान किया था, जो ऐसी वैसी गाय नहीं, जो उपयोगी हुआ करती थी,उस तरह गाय का दान किया था। राजा नृग की कथा से इस कलयुग के लोगों को भी सीख लेनी चाहिए कि दिया हुआ दान वापस नहीं लेना चाहिए। कथाव्यास जी ने गायों की दुर्दशा के बारे में चिंता जताई कि आजकल लोगों की गाय जब तक दूध देती है, तब तक उसको रखते हैं,उसके बाद छोड़ दिया जाता है। जो सड़कों पर भी देखी जाती हैं जो दुर्घटना का शिकार हो रही हैं। लोग गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने की बात करते हैं, और सरकार को कोसते हैं,कि सरकार ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार कहती है क्या ? कि गाय को सड़कों पर छोड़ दिया जाय। इस तरह उन्होंने सातों दिन अपने श्री मुख विधिवत श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन किया। संगीतमयी भजनों से श्रोताओं को बिल्कुल मंत्रमुग्ध कर देते थे। साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ में प्रत्येक दिन कथा श्रोताओं से पांडाल खचाखच भरा रहता था। जिसमें प्रमुख व्यवस्थापक के रूप में अरविंद कुमार पांडेय, कुशल एवं आदर्श शिक्षक आशुतोष पांडेय , शिवाकांत द्विवेदी जी ने पूरी व्यवस्था को कुशलता व निपुणतापूर्वक देखा । आशुतोष पांडेय जी आने वाले सभी श्रोताओं को समुचित स्थान दिलाने का पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से देखने का कार्य सातों दिन करते रहे। जिसकी लोगों ने खुलेमन से तारीफ की। कथा विश्राम के समय विदाई गीत ने सबको भावविभोर कर दिया। अंत में कथा में कुछ गणमान्य लोगों का कथा के मुख्य यजमान ने राधेश्याम की प्रतिमा प्रदान कर सम्मान व स्वागत किया। अंतिम में प्रसाद वितरण के दौरान मुख्य यजमान प्रमोद कुमार पांडेय ने अपने से बड़ो का पैर छूकर आशिर्वाद लिया व अपने से छोटे लोगों को आशीष प्रदान किया ,और सभी से आज गुरुवार को महाप्रसाद (भंडारे)में पहुँचने की अपील की। बता दें कि उक्त कथा को ऐतिहासिक कहा जा सकता है। उक्त सुंदर कथा की क्षेत्र में चर्चा है।उक्त कथा अवसर पर जिला पंचायत सदस्य पं0 इंद्रदेव तिवारी, गिरिजाशंकर मिश्र कोटेदार, रामदत्त मिश्र,श्याम शंकर मिश्र, विमल चंद मिश्र, रामचंद्र मिश्र श्भारतश्, विनोद पाठक, राजकुमार दुबे, आनंद मिश्र, दिनेश कुमार तिवारी, दिनेश कुमार मिश्र, नरेंद्र कुमार मिश्र, अनिल कुमार पांडेय, मोहित, हर्षित,शुभम,यश,प्रभव, शान्तनु, अंश मितांश,राघव,शिवाय, त्रिनय, सौम्या, अंशिका, मीनाक्षी, एवं समस्त पांडेय परिवार उपस्थित रहे।
