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लखनऊ: आरटीओ ऑफिस ट्रांसपोर्ट नगर में व्यवस्था पर सवाल, 35 बाबूओं के होते हुए स्टेनो से कराया जा रहा एनओसी और आरसी प्रिंट का काम, प्राइवेट लड़कों से काम कराने का अंदेशा



लखनऊ। राजधानी के आरटीओ कार्यालय ट्रांसपोर्ट नगर में कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्यालय में लगभग 35 बाबूओं की तैनाती होने के बावजूद एनओसी जारी करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आरटीओ प्रशासन के स्टेनोग्राफर से कराई जा रही है, जो पूरी तरह से विचारणीय है।5 जिलों का बोझ, ऊपर से एनओसी का दबाव -

आरटीओ प्रशासन की जिम्मेदारी देख रहे स्टेनो अरुण यादव के पास पहले से ही लगभग पांच जिलों के पत्र व्यवहार सहित अन्य तमाम शासकीय कार्य हैं। वर्तमान में स्टेनोग्राफर के पद पर कार्य करते हुए उनके लिए एनओसी जारी करना पूर्ण रूप से संभव नहीं है। नई व्यवस्था के तहत एनओसी के साथ-साथ आरसी को प्रिंट करना भी अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे कार्यभार कई गुना बढ़ गया है।स्टेनो रूम में न व्यवस्था, न संसाधन -

स्टेनो रूम में शासकीय बैठकों और अन्य कार्यों के चलते न तो इस कार्य के लिए कोई उचित व्यवस्था है और न ही स्टेनोग्राफर स्तर के लिपिक से इस प्रकार का कार्य कराया जाना न्यायोचित है।प्राइवेट लड़कों से काम कराने का अंदेशा -

अधिक कार्यभार और दबाव होने पर प्राइवेट लड़कों या अनाधिकृत व्यक्तियों को सहायता के लिए रखकर काम कराए जाने का भी अंदेशा बना हुआ है, जो सुरक्षा और गोपनीयता की दृष्टि से बेहद खतरनाक है। इससे फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।10 काउंटर खाली, फिर भी स्टेनो पर बोझ क्यों?

समस्त कार्य ऑनलाइन होने और ऑटो अप्रूवल की सुविधा के बाद पहले से बने हुए 10 काउंटरों में नंबर सीरीज के अनुसार आरसी और एनओसी का कार्य काउंटरों पर बैठे बाबूओं से ही कराया जाना चाहिए। इससे शासकीय कार्य और जनहित के कार्य दोनों सुगम और सुचारू रूप से हो सकेंगे और आम जनता को अनावश्यक परेशानी से निजात मिलेगी।

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