प्रतापगढ़। जिले में जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने सोमवार को बताया है कि बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे चक्रवाती मौसम तंत्र के प्रभाव से जनपद में 28 से 30 अक्टूबर के बीच तेज झोंकेदार हवाओं, गरज-चमक, वज्रपात एवं भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), लखनऊ के पूर्वानुमान के अनुसार इस दौरान 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। जनपद को येलो जोन में रखा गया है।
जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि मौसम की संभावित स्थिति को देखते हुए धान की कटाई, मड़ाई एवं रबी फसलों की बुवाई में विशेष सावधानी बरतें। वर्तमान समय में जनपद में धान की कटाई-मड़ाई के साथ रबी फसलों की बुवाई का कार्य भी चल रहा है। कृषि विभाग ने सलाह दी है कि जो धान की फसल कटाई के लिए तैयार है, उसे मौसम साफ रहने की स्थिति में 28 अक्टूबर से पहले यथासंभव काट लें। कटी हुई फसल को खेत में खुले में न छोड़ें और सुरक्षित स्थान अथवा खलिहान में रखें। धान के बोरे एवं गट्ठरों को तिरपाल या पॉलीथिन से ढककर रखें, ताकि बारिश का पानी अनाज को नुकसान न पहुंचा सके। भारी बारिश अथवा गरज-चमक के दौरान मड़ाई एवं थ्रेशिंग का कार्य न करें और खुले खेत में जाने से बचें। यदि धान बारिश में भीग जाता है तो मौसम साफ होते ही उसे फैलाकर अच्छी तरह सुखाएं तथा अधिक नमी वाले धान का भंडारण न करें। खेतों में जल निकासी की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें।
उन्होने बताया है कि रबी फसलों की बुवाई को लेकर कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि 28 से 30 अक्टूबर के दौरान संभावित भारी बारिश को देखते हुए मौसम साफ होने तथा खेत में अत्यधिक जलभराव न होने पर ही बुवाई करें। अत्यधिक गीली मिट्टी में बुवाई करने से बीज के सड़ने और अंकुरण प्रभावित होने की संभावना रहती है। जिन किसानों ने रबी फसलों की बुवाई कर दी है, वे खेतों में जल निकासी के लिए आवश्यक नालियां बना लें। बुवाई से पहले प्रमाणित बीज एवं बीजोपचार का प्रयोग करें। भारी बारिश की संभावना से पहले उर्वरक की अनावश्यक अथवा अधिक मात्रा डालने से बचें और आवश्यकता के अनुसार बारिश के बाद टॉप ड्रेसिंग करें। तेज बारिश के बाद मिट्टी की ऊपरी सतह पर परत जमने की स्थिति में हल्की निराई-गुड़ाई करें। मौसम को देखते हुए खेतों में अनावश्यक सिंचाई न करें।
उन्होने किसानों को आंधी-तूफान एवं वज्रपात के दौरान खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों के नीचे तथा जलभराव वाले स्थानों पर आश्रय न लेने की सलाह दी है। बिजली के खंभों, तारों एवं धातु के कृषि यंत्रों से दूरी बनाए रखें। पशुओं को भी खुले स्थान पर न छोड़ें और सुरक्षित बाड़े में रखें। मौसम की पूर्व चेतावनी के लिए किसानों से मोबाइल में ‘सचेत’ एवं ‘दामिनी’ एप डाउनलोड करने की अपील की गई है। आपात स्थिति में 112 पर संपर्क करने अथवा निकटतम कृषि एवं प्रशासनिक कार्यालय से सहायता लेने की सलाह दी गई है। जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि मौसम विभाग की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए फसल, कृषि उपज एवं पशुधन की सुरक्षा के लिए समय रहते आवश्यक इंतजाम कर लें।
