दीपावली पर व्यापारी व्यापार करे तो क्या करे? एक तरफ माप-तौल, दूसरी तरफ खाद्य विभाग की कार्रवाई की चिंता
मेरठ/मवाना। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल मवाना इकाई के संरक्षक शैवाल दुबलिश, अध्यक्ष मांगेराम मित्तल एवं महामंत्री अंकित जैन ने माप-तौल विभाग में पहुंचकर व्यापारियों की समस्याओं पर चर्चा की।
माप-तौल विभाग के अधिकारी सूरजभान वर्मा ने बताया कि जिलाधिकारी मेरठ की बैठक में पैकिंग में सामान बेचने वाले व्यापारियों के संबंध में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बताया गया कि पैकिंग खर्च एवं वस्तु की कीमत को नियमानुसार स्पष्ट रूप से दर्शाना होगा तथा उल्लंघन पाए जाने पर व्यापारी का चालान कर उसकी सूचना जिलाधिकारी को भेजी जाएगी।
व्यापारियों का कहना है कि दीपावली जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक सीजन में यदि हर छोटी तकनीकी कमी पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई का भय रहेगा तो छोटा व्यापारी आखिर व्यापार करे तो कैसे करे? व्यापारियों ने मांग की कि पैकिंग, ळैज् बिल और माप-तौल से संबंधित नियमों की स्पष्ट लिखित जानकारी पहले उपलब्ध कराई जाए तथा जागरूकता का अवसर दिया जाए।
व्यापारियों ने यह भी कहा कि एक तरफ माप-तौल विभाग की कार्रवाई, दूसरी तरफ खाद्य विभाग द्वारा त्योहारी सीजन में जांच एवं सैंपलिंग अभियानकृऐसे माहौल में व्यापारी लगातार आशंकित है। थ्ैै।प् ने भी 29 सितंबर 2026 को त्योहारी सीजन में विवक-ेंमिजल, ेनतअमपससंदबम और मदवितबमउमदज कतपअम के निर्देश जारी किए हैं।
व्यापारियों ने व्यंग्य करते हुए कहाकृ“सरकार व्यापार बढ़ाने की बात करती है, लेकिन यदि व्यापारी को हर कदम पर चालान और सैंपल का डर रहेगा तो वह व्यापार करे या फाइलों और नोटिसों का जवाब देता रहे?”
इतना ही नहीं, जिस माप-तौल विभाग में व्यापारी नियम समझने पहुंचे, वहां पहुंचना भी किसी परीक्षा से कम नहीं। स्थ्ब् फूड कोर्ट खुलने के बाद कार्यालय का पुराना रास्ता अवरुद्ध होने से व्यापारियों को ऊपर चढ़कर छत के रास्ते दूसरे जीने से नीचे उतरते हुए फूड कोर्ट की रसोई वाले हिस्से से होकर कार्यालय पहुंचना पड़ रहा है। कार्यालय में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है।
व्यापार मंडल ने कहा “व्यापारी नियमों का पालन करने को तैयार है, लेकिन नियम स्पष्ट हों, कार्रवाई से पहले जागरूकता हो और विभागीय कार्यालय तक पहुंचने का रास्ता तो कम से कम व्यापारी के लिए खुला हो।”
व्यापारियों का सवाल है दीपावली पर व्यापार करें तो करें क्या? नियमों की सीढ़ियां चढ़ें या कार्यालय तक पहुंचने की सीढ़ियां?
